दहलीज

अनन्तराम चौबे ‘अनन्त’
जबलपुर(मध्यप्रदेश)
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घर की दहलीज,
घर की इज्जत का
सुनहरा परदा है।
माँ-बहिन-बेटियों की
मान है मर्यादा है॥
घर के आँगन की
चौखट में दादी का,
पहरा रहता है।
बहिन-बेटियाँ-दादी की
सुरक्षा में रहती है॥
लालन-पालन से दादी
के कलियाँ-सी खिलती है।
नन्हीं-नन्हीं ये कलियाँ,
दादी और माँ के पद
चिन्हों पर चलती है॥
नन्हीं बेटियों की
किलकारी सबके,
मन को भाती है।
बेटी के सुन्दर सपनों
की मंजिल यहीं पर होती है॥
घर-आँगन की दहलीज में,
रहकर अच्छी शिक्षा मिलती है।
माँ-दादी का सुन्दर सपना,
बहिन-बेटी ही तो होती है।
घर की दहलीज के अन्दर ही
सब शिक्षा-दीक्षा मिलती है॥
परिचय-मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित नर्मदा नगर में अनन्तराम चौबे का निवास हैं। लेखन के क्षेत्र में काफी सक्रिय श्री चौबे की रचनाएँ विविध समाचार पत्रों में सतत प्रकाशित होती रहती हैं। श्री चौबे का जन्म २१ फरवरी १९५२ में बड़ी देवरी कला में हुआ है। आपका उपनाम अनंत है। आपने उच्चतर माध्यमिक शाला से १० वीं उत्तीर्ण की है। आपने बड़ी देवरी कला (सागर,म.प्र.) से रेलवे सुरक्षा बल (जबलपुर) और यहाँ से फरवरी २०१२ में लेखन क्षेत्र में प्रवेश किया है। लेखन में अब तक हास्य व्यंग्य,कविता,कहानी, उपन्यास के साथ ही बुन्देली कविता-गीत भी रचे हैं। आपका काव्य संग्रह ‘मौसम के रंग’ प्रकाशित हो चुका है। लेखन के लिए श्री चौबे को जबलपुर विश्वविद्यालय ने २०१७ में सम्मानित किया है। श्री चौबे का उपनाम अनंत है। आपके अनुसार १९८५ से ९१ तक जबलपुर के सभी पत्रों में रचनाएं छपती थीl फिर ९२ से २०१४ तक लिखना बन्द कर दिया था,पर १५ से फिर से लिखना शुरू किया हैl आपको २०१७ में `ममतामयी माँ` व `सुनहरा कल` काव्य संग्रह के विमोचन अवसर पर साहित्य सुधाकर अलंकरण से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही साहित्य गौरव सम्मान,शतकवीर सम्मान,साहित्य प्रतिभा सम्मान तथा स्मृति चिन्ह,काका हाथरसी सम्मान- २०१७ तथा प्रतापनारायण मिश्र सम्मान सहित ३३ सम्मानों से सम्मानित किया गया है। आप कई साहित्य मंचों से जुड़े हुए हैं और काव्य गोष्ठियों में रचना पाठ करते हैं। ऑनलाइन पटलों पर भी आपकी रचना प्रदर्शित होती हैं। ३ संयुक्त काव्य संकलन में इनकी कविता छपी है,साथ ही इनकी तीन रचनाओं का साथी की आवाज में आडियो बना है।

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