दिल नहीं,दिमाग से हो मतदान

हेमेन्द्र क्षीरसागर
बालाघाट(मध्यप्रदेश)
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भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है,देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को विश्व में बडे सम्मान,स्वच्छंदता के साथ देखा जाता है। इस महान लोकतांत्रिक परम्परा के महायज्ञ का आगाज चुनाव आयोग ने कर दिया। इस दौर में पांच राज्यों में सम्पन्न होना है,जिसमें सभी मतदाताओं को अपनी मतदान रूपी आहुति देना है। पुण्य स्वरूप हमारा लोकतंत्र और अधिक मजबूत,सर्वस्पर्शी बनेगा। मतदान से ही अपने जनप्रतिनिधि को चुनेगें,वह जनप्रतिनिधि प्रदेशों की नई सरकारों का गठन करेगें। नई सरकारों से हमारी बहुत सारी आशाएं,अपेक्षाएं, जरूरतें जुड़ी हुई हैं। यह सरकारें प्रदेश के विकास,जनकल्याण और देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। आखिर यह सब संभव होगा हमारे मतदान से,यह मत रूपी दान,दिल की आवाज सुनकर,भावनाओं में बहकर नहीं,वरन् अपने दिल की विवेकशीलता से करना होगा। तात्पर्य यह कि,प्रत्याशियों के गुणों अथवा अवगुणों का मुल्यांकन योग्यता,निष्ठा और सुलभता के भाव से करना होगा। भय,पक्षपात,घृणा से नहीं, तभी एक अच्छे,स्वच्छ,कर्मठ जनप्रतिनिधि का चुनाव कर पायेंगे। भावनाओं से अंगीकृत होकर प्राय: हम-दलगत भाव, धन,जाति-धर्म,लालच,झूठे प्रलोभन और नशे को दृष्टिगत रखते हुए मतदान करने में प्रबल होते रहे हैं,इस सोच को बदलना होगा। इसके विपरीत मन-मस्तिष्क से विचारशीलता के भाव को परिलच्छित कर,एक सुयोग्य प्रतिनिधि का निर्वाचन कर सकते हैं। वस्तुत: दिल से नहीं,दिमाग से मतदान करना अच्छे जनप्रतिनिधि व अच्छी सरकार का चुनाव करना है। यही अच्छी सरकार,सुखी परिवार का आधार होगी। ऐसा विवकेशील चुनाव देश के हित में लाभकारी कदम है…।
आम धारणा रहती है,कि मैं `मत` दूगां तो मुझे क्या मिलेगा और `मेरे एक मत से क्या होगा ?` अगर सभी की धारणा ऐसी हो जाये तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जायेगा ? यह विचार सर्वथा गलत है,क्योंकि एक मत से सरकार बनती है और गिरती भी है। यह सब हम देख चुके हैं,इसीलिए हमारे एक मत का वही महत्व है,जो सबके मत का है,हम सब एक समान हैं। किसी के भी मत की कोई कीमत नहीं हो सकती,यह अमूल्य है। सबके मत एक समान हैं,चाहे वह पुरूष-स्त्री,अमीर-गरीब,शिक्षित-अशिक्षित, मजदूर-किसान,व्यापारी-अधिकारी जो भी हो देश के सभी मतदाताओं में कोई अंतर नहीं है। अंतर है तो सोच का,सोच ही हमारी तरक्की और तकदीर का भाग्य निर्माता है। नकारात्मक सोच विनाश का प्रतिकार है,तो सकारात्मक सोच विकास का प्रतिबिम्ब। मतदान हमारा अधिकार और जिम्मेदारी भी है। इसे पूर्ण-निष्ठा,लगन और स्वतंत्रता के साथ निर्वहन करने की आवश्यकता है।
अलमस्त,हम इतने व्यस्त रहते हैं कि,हम मतदान तक नहीं करते। वह मतदान जो हमें संविधान ने अमूल्य धरोहर के रूप में दिया है। हम मतदान नहीं करके अपने संविधान का अपमान कर रहे हैं। यह धरोहर हमारे पास न रहे,तो हमें कौन पूछेगा, हमारी कौन सुनेगा,यह अत्यंत गंभीर प्रश्न है ? आज जब हम मत देते हैं,फिर भी हमारी पूछ-परख,चिंता,कल्याण करने वाले प्रतिनिधि कम ही होते हैं। सोचिए!,अगर मतदान का अधिकार हमारे पास न रहे तो हमारी कौन सुनेगा,यह सुनकर ही भय लगता है। विडबम्ना है कि,हमें अपने `मत अधिकार` के प्रति संचेतना,जागरूकता प्रदान करने के लिए जन-जागरण अभियान,कार्यशाला,परिचर्चा,रैली,नारे और नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जा रहा है,जिससे हम अधिक-अधिक मतदान करने के लिए प्रेरित हो सकें। क्या हम अपने मताधिकार के प्रति निष्ठावान,समर्पित और विश्वासप्रद नहीं है। इस भ्रांति को हमें दूर करना है,क्योंकि आज सारी दुनिया हमें निहार रही है, कि हम भारत वासी अपने लोकतंत्र व मतदान के प्रति कितने सजग-जागरूक है। हम अपने मत का कितना उपयोग करते हैं। हमारा कम मतदान करना हमारी अज्ञानता,लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास के भाव का परिचायक है।
दूसरी ओर जब हम अपने लिए कोई सामान क्रय करते हैं,तो काफी खोज-खबर,नाप-तौल,मोल-भाव करते हैं। यहां तक जूते-चप्पल तक खरीदते हैं तो काफी सजगता-गंभीरता का परिचय देते हैं,तो फिर मतदान करने में ऐसा क्यों नहीं करतें ?,जबकि मतदान हमारा अधिकार,हमारा कर्त्तव्य व भविष्य भी है। उसका पालन क्यों नहीं करते,हम मतदान से वंचित क्यों रह जाते हैं। यह स्वस्थ मानव के लिए खेदजनक है,इसे जड़-मूल से समाप्त करने की पहल होना चाहिए। अब जन-जन से यही है,पुकार मतदान करे अबकी बार। हम संकल्पित होकर स्वंय,परिवार, आस-पड़ोस में यह जन-जागृति अर्पित कर दे,कि कोई भी मतदाता मतदान से वंचित न रह जायें। प्रतिफल स्वरूप सभी मतदाता अपने समर्पण,विवेक और निर्भीकता के साथ मताधिकार का उपयोग राष्ट्रहित में करें।
चुनाव हमारे लिए एक राष्ट्रीय पर्व हैं,इसमें हमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना ही होगा। जिस प्रकार हम अपने राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस के दिवस के अवसर पर मान, सम्मान और समर्पण के साथ अपने सारे काम छोड़कर अपनी सहभागिता,जवाबदेही समर्पित करते हैं। इसी भावशीलता के बोध से सारे काम छोड़कर सबसे पहले अपनी सोच के साथ मतदान करना होगा। अंतत:,आज कुल मतदाताओं में से प्राय: ६०-६५ प्रतिशत मतदाता ही अपने मत का प्रयोग करते हैं। इससेे कम मत पाकर अनचाहेे जनप्रतिनिधि जीत जाते हैं,और अनचाहीं सरकार बन जाती हैं। यह सोचनीय प्रश्न हैं ?,अगर शत-प्रतिशत मतदाता मतदान करें तो जीतने वाला हार जायेगा,हारने वाला जीत जायेगा। पूर्ण मतदान से ही सुयोग्य प्रत्याशी का चयन संभव है। हमें पूर्ण मतदान करके अपनी मतदान शक्ति को राष्ट्रहित में समर्पित करना होगा…।

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