दीपमाला

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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दीपावली पर्व विशेष, दीप पर्व आपको आलोकित करे…..
चलो कुछ ऐसा
किया जाए,
किसी रोते हुए को
हँसाया जाए।
मुस्कुराहट है,देन
प्रभु की,
सूने आंगन में
एक दीप ‘आशा’ का
जलाया जाए।
रंगोली-मांडने से
सजा हो,घर सबका,
प्रेम का एक ‘वंदनवार’
लगाया जाए।
खील-बताशे तो
खूब खाए हमने,
इस बार,औरों का
मुँह मीठा कराया जाए।
यूँ तो रोशन है,
मेरे दिल का हर एक कोना,
आओ,हर दिल को,
रोशन किया जाए॥
परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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