दीपावली

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’
जयपुर (राजस्थान)
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दीपावली पर्व विशेष, दीप पर्व आपको आलोकित करे…..

तू आज जला ले दीप,अंधेरा जायेगा।
फिर साफ दिखेगी राह,तू मंज़िल पायेगा॥

जिन चेहरों से मिलता है,पहचान उन्हें क्या पाया,
इन छद्म मुखौटों का जो,है सत्य, जान क्या पाया।
तू मन को कर ले दीप्त,इन्हें पढ़ पायेगा,
तू आज जला ले दीप,अंधेरा जायेगा॥

जो आँगन झेल रहा है,वर्षों से गहन तमस को,
बूढ़ी अँखियाँ पथराई,तकते हुए सुबह को।
अब तू जो बने प्रदीप,उजाला आयेगा,
तू आज जला ले दीप,अंधेरा जायेगा॥

सुख का सूरज रूठा है,दुःख के तम ने लूटा है,
अपनों की ही करनी से,घर जिनका टूटा है।
तू जला प्रीत की जोत,वो घर मुस्काएगा,
तू आज जला ले दीप,अंधेरा जायेगा॥

हो सघन निशा जितनी भी,हारी है दीप के बल से,
इक ज्योति बिंदु है काफ़ी,पाने को विजय तिमिर पे।
रख आशा और विश्वास,सवेरा आयेगा,
तू आज जला ले दीप,अंधेरा जायेगा।
फ़िर साफ दिखेगी राह,तू मंज़िल पायेगा॥

परिचय-निर्मल कुमार शर्मा का वर्तमान निवास जयपुर (राजस्थान)और स्थाई बीकानेर (राजस्थान) में है। साहित्यिक उपनाम से चर्चित ‘निर्मल’ का जन्म १२ सितम्बर १९६४ एवं जन्म स्थान बीकानेर(राजस्थान) है। आपने स्नातक तक की शिक्षा (सिविल अभियांत्रिकी) प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र-उत्तर पश्चिम रेलवे(उप मुख्य अभियंता) है।सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आपकी साहित्यिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी है। हिंदी, अंग्रेजी,राजस्थानी और उर्दू (लिपि नहीं)भाषा ज्ञान रखने वाले निर्मल शर्मा के नाम प्रकाशन में जान्ह्वी(हिंदी काव्य संग्रह) और निरमल वाणी (राजस्थानी काव्य संग्रह)है। प्राप्त सम्मान में रेल मंत्रालय द्वारा मैथिली शरण गुप्त पुरस्कार प्रमुख है। आप ब्लॉग पर भी लिखते हैं। विशेष उपलब्धि में  स्काउटिंग में राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त ‘विजय रत्न’ पुरस्कार,रेलवे का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त, दूरदर्शन पर सीधे प्रसारण में सृजन के संबंध में साक्षात्कार,स्व रचित-संगीतबद्ध व स्वयं के गाये भजनों का संस्कार व सत्संग चैनल से प्रसारण है। स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन होता रहता है। लेखनी का उद्देश्य- साहित्य व समाज सेवा है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-प्रकृति व समाज है। विशेषज्ञता में स्वयं को विद्यार्थी मानने वाले श्री शर्मा की रूचि-लेखन,गायन तथा समाज सेवा में है।

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