दुनिया से बचाकर रखना

गीता गुप्ता ‘मन’
उन्नाव (बिहार)
*************************************************************************************
बड़े मासूम है ये गुल इनको खिलाकर रखना,
नन्हीं है परी इसे दुनिया से बचाकर रखना।

बड़ी कश्मकश से उसने दुनिया में कदम रखा है,
है बेशकीमती इन्हें ताज बनाकर रखना।

झेला है जन्म लेते ही जिसने भेदभाव का जहर,
हर पल उन्हें खुशियों की किताब बनाकर रखना।

है चिड़िया आँगन की रोशन दो जहाँ करती,
एतबार इन पर बेहिसाब बनाकर रखना।

तितलियों-सी हर आहट से सहम जातीं हैं,
दरवाजों पे खड़े अजनबियों से बचाकर रखना।

चुरा लेते हैं सरेआम आँखों से काजल,
अपनी लिखावट की सदा इनसे बचाकर रखना।

क्या हो गया है इस जमाने को आज ‘मन’,
प्यारी इन नज़्मों को दुनिया से बचाकर रखना॥

परिचय:गीता गुप्ता का साहित्यिक उपनाम ‘मन’ है। आपका जन्म ८ मई १९८७ को उत्तर प्रदेश की उन्नाव जनपद के बिहार ग्राम में हुआ है। वर्तमान में हरदोई(उ.प्र.) शहर में और स्थाई पता ग्राम राधागंज जिला उन्नाव (बिहार)है। स्नातक,परास्नातक तथा बीएड शिक्षित गीता गुप्ता का कार्यक्षेत्र -अध्यापन(प्रा. विद्यालय में शिक्षिका) है। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत,बाल कविता ग़ज़ल और हायकू आदि है। ‘मन’ की रचनाओं को स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में स्थान मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी से प्रेम और इसका विश्व पटल पर सम्मान बढ़ाना है। हिन्दी और आंग्लभाषा की अनुभवी गीता गुप्ता की रुचि-बच्चों को पढ़ाने, कविता लिखने,संगीत सुनने एवं पुस्तकें पढ़ने आदि में है।

Hits: 18

आपकी प्रतिक्रिया दें.