दुल्हन की बात थी…

डॉ.जियाउर रहमान जाफरी
नालंदा (बिहार)
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रिमझिम बरस रहा था जो सावन की बात थी,
हम कुछ गुनाह कर गए बचपन की बात थीl 

वो शख्स मुझसे रोज़ जिगर मांगता रहा,
इक दिल हमारे पास था,उलझन की बात थीl 

खुशबू सितारे चाँद सभी हमने दे दिए,
रखना था क्या बचा कि जो साजन की बात थीl 

मेहनत से हमने गेहूं का आटा तो ले लिया,
भूखा मैं आज फिर रहा,ईंधन की बात थीl 

तितली फलक से उड़ के फकत देखती रही,
भौरों ने जां लगा दी,गुलशन की बात थीl 

इतनी-सी बात पर न तमाशा हुआ करे,
ये सब निपट ही जाता कि आँगन की बात थीl 

तुमने डुला कि उसको कहीं और कर दिया,
चेहरा मैं देखता रहा,दर्पण की बात थीl 

बचपन की गलतियों से न बिखरे ताल्लुक़ात,
परदा मैं डाल आया था,दुल्हन की बात थीll   

परिचय-आप शायर और आलोचक हैं तथा हिन्दी,उर्दू सहित मैथिली भाषा के कई पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन जारी है। डॉ.जियाउर रहमान जाफरी की शिक्षा एम.ए.(हिन्दी) और बी.एड. सहित पीएचडी(हिन्दी) है।आपकी प्रकाशित कृति मेंं ‘खुले दरीचे की खुशबू(हिन्दी ग़ज़ल)’,और ‘खुशबू छूकर आई है’तथा  ‘चाँद हमारी मुट्ठी में है(बाल कविता)’  आदि हैं। आप आपदा विभाग और राजभाषा विभाग(बिहार) पुरुस्कृत हैं।डॉ.जाफरी का निवास बिहार राज्य के नालंदा जिला स्थित बेगूसराय में है। आप बतौर सम्प्रति बिहार सरकार में अध्यापन में सक्रिय हैं। 

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