देखो आजकल

सुदामा दुबे 
सीहोर(मध्यप्रदेश)

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बदले हुए से लगते हैं देखो आजकल,
रातों में जगे लगते हैं देखो आजकल।
अंदाज भी कुछ उनका दिखता है अलग- सा,
कुछ सोंच में डूबे से लगते हैं देखो आजकल।
होंठों में उनके आज शरारत दिखी हमें,
प्यासे हुए से लगते हैं देखो आजकल।
चाँद से चेहरे पर उनके झलक रहा नूर,
सँवरे हुए से लगते हैं देखो आजकल।
मचल रहे दिल में अरमान बार-बार,
चहके हुए वो लगते हैं देखो आजकल।
चाल भी कुछ उनकी बदली दिखी हमें,
बहके हुए वो लगते हैं देखो आजकल॥
परिचय: सुदामा दुबे की की जन्मतिथि ११ फरवरी १९७५ हैl आपकी शिक्षा एम.ए.(राजनीति शास्त्र)है l सहायक अध्यापक के रूप में आप कार्यरत हैं l श्री दुबे का निवास सीहोर(मध्यप्रदेश) जिले के बाबरी (तहसील रेहटी)में है। आप बतौर कवि काव्य पाठ भी करते हैं। लेखन में कविता,गीत,मुक्तक और छंद आदि रचते हैंl

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