देखो मेरी नजरों में…

गणेश देवासी ‘नरपुरियां’ 
नरपुरा (राजस्थान)
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रोज साहिल से समंदर का नजारा न करते,
अपनी सूरत को शबो-रोज निहारा न करते।

आओ देखो मेरी नजरों में उतरकर खुद को,
आइना हूँ तेरा मुझसे कभी किनारा न करते।

भूल जाते हैं इक-दूसरे का चेहरा कभी,
हम इक भूले हुए चेहरे से किनारा न करते।

तेरे चेहरे को देख हर बार रूठ जाता हूँ,
तेरे चेहरे को कभी दिल से निहारा न करते।

चाँद-तारे भी रूठ जाते हैं अपने अक्ष पर,
हम रूठ भी जाते हैं दिल से उतारा न करते।

हर पल वीरान-सा रहता हूँ तेरी यादों में,
मगर तेरी यादों से कभी बहाना न करते॥

परिचय-गणेश देवासी का उपनाम ‘नरपुरियां’ हैl जन्मतिथि १७ मई १९९५ में आपका जन्म बागरा (जिला जालौर, राजस्थान) में हुआ हैl गांव नरपुरियां में ही आपका निवास है। आपकी शिक्षा स्नातक(अंग्रेजी साहित्य,इतिहास, राजनीति विज्ञान) है। धानसा (जालौर) स्थित विद्यालय में आप अंग्रेजी विषय के शिक्षक के रुप में कार्यरत हैं। श्री देवासी सामाजिक गतिविधि के तहत नशे से होने वालि हानि व मुक्ति से होने वाले लाभ से सबको अवगत कराते हैं। साथ ही समाज को आगे बढ़ने में बाधक बनी दहेज जैसी अन्य कुप्रथाओं को मिटाने में आगे हैं। लेखन में आपकी विधा-ग़ज़ल और कविता है। कुछ कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में छपी हैं। बोली संवर्धन कार्यक्रम में आपको ‘गौरव सम्मान’ मिल चुका है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का प्रचार-प्रसार करना है।

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