देशप्रेम सर्वोपरि

दयाशंकर वर्मा ‘भारतीय’
कानपुर(उत्तरप्रदेश)
***************************************************************

काश मेरे गीतों में जुबान हो जाए,
मेरे गीत सबके लिए,एक इंसान बन जाए
न कोई हिन्दू,न कोई सिक्ख, न इसाई,न कोई मुसलमान बन जाए ,
सबसे बढ़कर दुनिया में एक ही मजहब है,इंसानियत
न गीता,न बाइबिल,न गुरुग्रंथ,न कुरान पढ़ी जाए।

न मंदिर,न चर्च,न गुरुद्वारा,न मस्जिदों से,
ये देश हमारा है,वीरों के बलिदानों से
इस देश की खातिर न जाने कितने देशभक्तों ने,

न जाने कितने अरमान संजोए हैं,
आज अगर पड़ गई जरुरत हमारी देश को,
तो सोचते रहते हैं कौन अपने-कौन पराए हैं।

यदि कोई पूछे-तुमसे इस देश की कितनी हैं ढाल,
तो कहना-दो ही रंग हैं इस देश में,

पहला हरा और दूसरा लाल।
हरा रंग देश के किसानों का है,
लाल रंग देश के जवानों का है।

बिना इन रंगों के देश का कोई आधार नहीं,
जो देश से प्यार न करें,वह केवल गद्दार है,इंसान नहीं
जात-पात के भेदभाव बनाकर नेताओं ने अपनी जेब भरीं,
करवाकर हिंदू-मुस्लिम दंगे, हमारे बीच हैवानियत की दीवार खड़ी।

देश का विकास वो कर न सके,उन्होंने केवल देश को विनाश दिया,
यदि देश में ऐसी ही परिपाटी चलती जाएगी,
ते आप जरा सोचें कि देश के भविष्य की क्या हालत हो जाएगी।
काश मेरे गीतों में जुबान हो जाए,
मेरे गीत सबके लिए,एक इंसान बन जाए॥

परिचय-दयाशंकर वर्मा का साहित्यिक उपनाम-दया ‘भारतीय’ है। कानपुर स्थित सिविल लाईन्स निवासी श्री वर्मा की जन्मतिथि १९ फरवरी १९८८ एवं जन्मस्थान लखीमपुर खीरी (उ.प्र.)है। आपका स्थाई पता-गोला गोकरन नाथ, जिला लखीमपुर खीरी है। इनकी शिक्षा सैन्य अध्ययन में स्नातकोत्तर तथा बी.एड. है। आपका कार्य क्षेत्र-शोध कार्य का है। इनके लिए लेखन की प्रेरणा पुंज-राष्ट्रीय समस्याएं हैं। दया ‘भारतीय’ की लेखनी का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से समाज में देशप्रेम की भावना को जगाना है,साथ ही इसे वरीयता देना है। इनकी लेखन विधा-कविता और लेख है। आप ब्लॉग पर भी लिखते हैं। 

Hits: 84

आपकी प्रतिक्रिया दें.