देश के विकास हेतु भविष्य में निवेश करें

सुश्री नमिता दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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५ अक्टूबर `अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस` ……………………….
शिक्षा समाज का दर्पण है,और इस दर्पण से शिक्षक ही समाज को रुबरु करवाता हैl वैदिक काल से शिक्षक ही ज्ञान का भान कराते रहे हैंl माता हमें नवजीवन देती है और पिता हमारी रक्षा करते हैं,लेकिन सच्ची मानवता शिक्षक ही सिखाते हैंl शिक्षक ही देश और दुनिया के लिए एक मुकम्मल समाज का निर्माण करते हैंl कबीर ने तो शिक्षक को गोविन्द से बढ़कर बताया हैl
आज विश्व के १०० से अधिक देश संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए एकजुट होने के नारे के साथ `विश्व शिक्षक दिवस` मना रहे हैंl हिन्दू धर्म में शिक्षक के लिए कहा गया है कि `आचार्य देवो भव` यानि आचार्य या शिक्षक ईश्वर के सामान होता हैl यह दर्जा एक शिक्षक को उसके द्वारा समाज में दिए गए योगदान के बदले दिया जाता हैl शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा ही पूज्यनीय रहा हैl
आज भी बहुत से शिक्षक आदर्शों पर चलकर एक आदर्श समाज की स्थापना में महती भूमिका निर्वहन कर रहे हैं,लेकिन इसके साथ-साथ ऐसे भी शिक्षक हैं जो शिक्षक और शिक्षा के नाम को कलंकित कर रहे हैंl शिक्षकों ने शिक्षा को व्यवसाय बना दिया है,वहीं शिक्षक के पद की गरिमा को धूमिल करने में परिवार समाज और सरकार भी बराबर जिम्मेदार हैl परिवार में बच्चों के दिल में शिक्षक के आदर और सम्मान का ध्यान नहीं रखा जाता हैl बच्चों द्वारा घर पर शिक्षक की थोड़ी-सी कमी को भी बहुत चटखारे से सुना जाता हैl अनुचित साधन अपनाने के लिए घर से भी प्रेरित किया जाता हैl
आज तमाम देशों में शिक्षक को उसके सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा,लेकिन क्या यह सम्मान शिक्षकों के लिए पर्याप्त है ? क्या आज हम शिक्षकों को वो सम्मान दे रहे हैं,जो आज से दशकों पहले गुरुओं का किया करते थे ? क्या आज भी छात्रों के दिल में शिक्षकों के लिए वह सम्मान और इज्ज़त है जो कभी एकलव्य जैसे छात्रों में हुआ करती थी ? क्या छात्र ही नहीं,समाज भी भगवान व माता-पिता के पहले गुरु को सम्मान दे रहे हैं ? शायद नहीं! हाल ही में जयपुर में एक कार्यक्रम में अध्यात्म गुरु श्रीश्री रविशंकर जी ने अपने बयान में सरकारी शालाओं को नक्सलवाद ओर हिंसावाद के गढ़ करार कर दियाl उन्होंने कहा कि,सरकारी शालाओं में नक्सलवादी पैदा होते हैं,इसलिए सरकारी शाला बंद कर देना चाहिएl माना कि,अपवाद हर जगह होते हैं किन्तु यह समाज के बुद्धिजीवी ठेकेदार ही शिक्षक की गरिमा का ख्याल नहीं करेंगे,तो छात्र तो निश्चित ही नक्सली बनेंगेl देश के सरकारी विद्यालयों का निजीकरण इतना आसान नहीं है,जहां देश के २५ करोड़ बच्चे पढ़ते हैं,और वह उस परिवेश से आते हैं जिन्हें निजी संस्था नकार चुकी हैl स्वयं यह छात्र भी इस चकाचौंध एवं महँगी शिक्षा में अपने-आपको पूर्ण नहीं पाते हैंl आज गैर शैक्षणिक सरकारी नीतियों के चलते शिक्षकों को शिक्षा के अलावा कई तरह के अन्य कार्य में पहली प्राथमिकता के आधार पर लिया जाता हैl यही वजह है कि,दायित्वों के बंधन में बंधकर शिक्षक सीमित हो गए हैंl
वैश्विक और आर्थिक युग में हर इंसान सुखी संपन्न होना चाहता हैl शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद भी व्यवसायीकरण ने शिक्षा को धंधा बना दिया हैl समाज शिक्षकों की असुविधाओं को देखकर भी उदासीन दिखता हैl समाज भी शिक्षकों के कंधे पर बच्चों के भविष्य निर्माण का भार तो सौंप देता है,लेकिन शिक्षकों के प्रति अपने दायित्वों को भूल जाता हैl समाज,सरकार और शिक्षा में तालमेल नहीं होने के कारण शिक्षकों के सामाजिक दर्जे में भारी गिरावट आ गई हैl कुल मिलाकर शिक्षक-शिष्य के सम्मानजनक संबंधों की छवि को खराब करने में समाज तथा सरकार दोनों का ही योगदान हैl समाज की उदासीनता,बच्चों की दिशाहीनता शिक्षा के गिरते स्तर के लिए जिम्मेदार हैl आज बहुत जरुरी है कि,परिवार,समाज,सरकार और शिक्षक सभी पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करें,तभी छात्रों का शैक्षणिक,मानसिक,सामाजिक व सांस्कृतिक विकास हो सकेगाl हमें भविष्य में निवेश करना होगाl शिक्षकों में निवेश करना होगा,तभी शिक्षक दिवस की सार्थकता प्रबल होगीl

परिचय : सुश्री नमिता दुबे का जन्म ग्वालियर में ९ जून १९६६ को हुआ। आप एम.फिल.(भूगोल) तथा बी.एड. करने के बाद १९९० से वर्तमान तक शिक्षण कार्य में संलग्न हैं। आपका सपना सिविल सेवा में जाना था,इसलिए बेमन से शिक्षक पद ग्रहण किया,किन्तु इस क्षेत्र में आने पर साधनहीन विद्यार्थियों को सही शिक्षा और उचित मार्गदर्शन देकर जो ख़ुशी तथा मानसिक संतुष्टि मिली,उसने जीवन के मायने ही बदल दिए। सुश्री दुबे का निवास इंदौर में केसरबाग मार्ग पर है। आप कई वर्ष से निशक्त और बालिका शिक्षा पर कार्य कर रही हैं। वर्तमान में भी आप बस्ती की गरीब महिलाओं को शिक्षित करने एवं स्वच्छ और ससम्मान जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। २०१६ में आपको ज्ञान प्रेम एजुकेशन एन्ड सोशल डेवलपमेंट सोसायटी द्वारा `नई शिक्षा नीति-एक पहल-कुशल एवं कौशल भारत की ओर` विषय पर दिए गए श्रेष्ठ सुझावों हेतु मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और कौशल मंत्री दीपक जोशी द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा श्रेष्ठ शिक्षण हेतु रोटरी क्लब,नगर निगम एवं शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संगठन द्वारा भी पुरस्कृत किया गया है।  लेखन की बात की जाए तो शौकिया लेखन तो काफी समय से कर रही थीं,पर कुछ समय से अखबारों-पत्रिकाओं में भी लेख-कविताएं निरंतर प्रकाशित हो रही है। आपको सितम्बर २०१७ में श्रेष्ठ लेखन हेतु दैनिक अखबार द्वारा राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया है। आपकी नजर में लेखन का उदेश्य मन के भावों को सब तक पहुंचाकर सामाजिक चेतना लाना और हिंदी भाषा को फैलाना है

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