द एक्सीडेंटल ‘आम आदमी’.

अशोक कुमार सेन ‘कुमार’
पाली(राजस्थान)
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यह शीर्षक आपको बड़ा रोचक लगा होगा,परन्तु यह सही ही है। भारतीय राजनीति में आम आदमी (कॉमन मैन) को लेकर नीतियां ऎसे(एक्सीडेंटली) ही बनी,या यूं कहें कि आजादी के बाद से अगर ‘आम या सामान्य आदमी’ का विकास हुआ तो यह संयोग मात्र था। इसे आप सुखद संयोग कह दें तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी ।
आम आदमी यानि मध्यम वर्ग,देश के विकास का आधार स्तम्भ,बाजार अर्थव्यवस्था की धुरी,सबसे बड़ा करदाता है जो व्यवस्था से न्यूनतम लेकर अधिकतम देता है। गरीब की तो बाजार तक पहुंच नहीं है और अमीर बाजार से परे है (छुट्टियों और खरीददारी के लिए विदेश जाता है )। मध्यम वर्ग को राजनीतिक दृष्टि से महज वोट बैंक समझा गया,लुभावने वादे किये जाते हैं और आश्वासन रूपी लॉलीपॉप मिलते रहते हैं। जो नीतयां मध्यमवर्ग को केन्द्रित रखकर बनाई जाती थी जिसका फायदा ‘आम आदमी’ को मिलना था,नहीं मिला। मूल उद्देश्य निजी स्वार्थ की सीढ़ी बनकर रह गया। राजनीति महज पैसा और ताकत का खेल बनकर रह गई। शुचिता की बात बेमानी हो गई। कालाधन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे चुनावों से पहले मुद्दे बनते हैं,और सरकारे बनते ही नेताओं में एक आपसी ‘सहमति(अन्डरस्टेण्डिंग)’ सी बन जाती हैं,मुद्दे आगामी चुनावों तक ठण्डे बस्ते में डाल दिये जाते हैं। जो भी मुद्दे या नीति बनाई जाती है उसका विशुद्ध उद्देश्य चुनावी सफलता प्राप्त करना होता है,इसके लिए भले ईमानदार करदाताओं की गाढ़ी कमाई लुटानी पड़े तो कोई परहेज नहीं। अर्थशास्त्र के नियमों को तिलांजलि देकर या यूं कहें कि अर्थशास्त्र की आहूति लोकतंत्र के यज्ञ में दे दी जाती है। हद तो तब होती है जब नियम बनता है कि आत्महत्या करने वालों की पूर्ण कर्जमाफी होगी। समझ नहीं आ रहा यह आत्महत्या को उकसाने वाला कृत्य क्यों नहीं कहा जा सकता ?
‘आम आदमी’ बोनसाई का वो पौधा है जिसमें वटवृक्ष बनने की पूरा सम्भावना थी परन्तु उसको पोषण उतना ही दिया गया कि वह गमले में रहे और सजावटी पौधा (वोट बैंक) बना रहे।
आज के परिप्रेक्ष्य में ‘एक्सीडेंटल कॉमन मैन’ की परिकल्पना सार्थक प्रतीत होती जा रही है। उसको नीतियों,परियोजनाओं और विकास का फायदा मिलना महज संयोग-दुर्घटना(एक्सीडेंटल) है, इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। अगर कुछ फायदा मिला या सम्बन्ध मिले तो इसे महज एक संयोग (एक्सीडेंटल) माना जाये।
परिचय-अशोक कुमार सेन का उपनाम ‘कुमार’ है। जन्म तारीख ३ मई १९८२ तथा जन्म स्थान-निमाज (जिला-पाली)है। वर्तमान में स्थाई पता निमाज (पाली)ही है। हिन्दी,अंग्रेजी व राजस्थानी भाषा की जानकारी रखने वाले श्री सेन की शिक्षा- स्नातकोत्तर है। आपका कार्यक्षेत्र-राजकीय कर्मचारी(नौकरी) का है। इनकी लेखन विधा-लेख और कहानी है। कुमार ब्लॉग पर भी लिखते हैं। लेखनी का उद्देश्य-लेखनी से मानव कल्याण एवं राष्ट्रहित के मुद्दे उठाना है। श्री सेन के लिए प्रेरणा पुंज-डॉ.अब्दुल कलाम हैं। विशेषज्ञता-समसामयिक आलेखन है।

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