धन बरसाने आई लक्ष्मी

राजेश पुरोहित
झालावाड़(राजस्थान)
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 दीपावली पर्व विशेष, दीप पर्व आपको आलोकित करे…..

धन बरसाने आई लक्ष्मी,घर-घर खुशियाँ छाई।
कर दरिद्र कोसों दूर,भण्डार भरने खुद माँ आई॥
भावों के दीप सजाकर,देखो कैसी रोशनी आई।
अमावस के घोर तिमिर को,जीतने रोशनी छाई॥
कतारें सज रही दीपों की,बाजार सजे-धजे भाई।
रंग-बिरंगे नव परिधानों में,सजे हैं जन जन भाई॥
मिष्ठानों की सजी दुकानें,व्यंजनों की बारी आई।
घेवर गुलाब जामुन मालपुए,नमकीन पुड़ी बनाई॥
घर आये अतिथियों के संग-संग सबने खूब उड़ाई।
भाईचारे व सदभाव की  मिलकर रंगोली सजाई॥
चमक रही दीवारें सारी,सज रही गली-गली भाई।
रंग-बिरंगी रोशनी से चमक रहे गली-चौबारे भाई॥
बैलों गायों भैसों की मेहंदी भी कैसी सजी है भाई।
पूजा इनकी करके कृषकों के देखो खुशियां आई॥
ट्रैक्टर मोटर कार बसों की पूजन भी करवाते भाई।
सिंदूर कुमकुम पान इत्र अगरबत्ती की खुशबू आई॥
माँ लक्ष्मी की होती आरती,विधि-विधान से भाई।
धन तेरस से भाई दूज तक,चलती है दीवाली भाई॥

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