धर्मनिरपेक्षता

सुजीत कुमार
गढ़वा(झारखंड)
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एक महान हिन्दू बाप के चार बेटे थे।ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र। चारों की कभी आपस में नहीं बनी,हमेशा एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ रहती थी। चारों एक भी मौका नहीं छोड़ते थे। ये देख उसके पिता हिन्दू चिंता में रहने लगे।
उन्होंने चारों बेटों को ‘एकता’ का पाठ सिखाना चाहा। इसके लिए उन्होंने मुगल नाम के धूर्त इन्सान को बेटों के सामने लाकर खड़ा किया,और ऐलान किया कि जो भी मेरे प्राण,निष्ठा,सम्मान की रक्षा इस दुष्ट से करेगा,वही मेरे धन-सम्पदा और संसाधनों का असली हकदार होगा।
ब्राह्मण-बाबूजी मैंने तो बस आपके चरणों में पड़े रहने की कसम खाई है। मुझसे ये लड़ाई-झगड़े नहीं हो पाएंगे, मुझे बस आपकी सेवा करने दें।
क्षत्रिय-बाबूजी आप चिंता न करें,मेरे रहते हुए आपके उपर कोई आंच नहीं आएगी। ऐसे सैकड़ों लोगों से भिड़ जाएगा आपका बेटा,आपके सम्मान के लिए।
वैश्य-बाबूजी इसको और तो कुछ करने का है नहीं,करना तो मुझे पड़ता है। आपके भोजन का प्रबन्ध,खेतों में बुआई, पैसे का प्रबन्ध सब मुझे करना पड़ता है। मैं युध्द करने लगूंगा तो ये सब कौन करेगा ?
शूद्र-बाबूजी,आपने तो हमें युध्द कला सीखने का मौका ही नहीं दिया। हमें हमेशा से वंचित करके रखा,फिर भी आप चाहते हैं कि मैं युध्द करुं तो मेरी एक शर्त है। मैं एक ही मारुं तो मंझले भाईया के चार के बराबर होगा।

इस प्रकार चारों भाई ने एकता नहीं दिखाई,और साथ नहीं लड़े। ऎसे में एक-एक करके सभी हार गए। फिर तो क्या हुआ,हम सभी जानते हैं। हमारे देश में जिसका भी मन करता,चला आता,इसको लूटता तथा यहाँ की खाकर इसी की बुराई करता। जब हमें लगा कि कोई भी जीत हमारे बस की बात नहीं,तो हमने शर्म के मारे ‘धर्मनिरपेक्षता’ की काली चादर ओढ़ ली,क्योंकि अब ये भारत केवल भरत का बेटा नहीं है,इसके सैकड़ों बाप बनने में लगे हुए हैं। हालांकि,इसके बाद भी देश एक है,तथा अनेक बार इस एकता को सबने देखा भी है। और जब भी हम इस चादर को ओढ़कर लड़खड़ाकर गिरते हैं तो यही कहते हैं-सब ठीक-ठाक है।
(विशेष-रचना का उद्देश्य एकता पर बल देना है,किसी की भावना को आहत करना नहीं है।)

परिचय-सुजीत कुमार की उम्र करीब १८ वर्ष है। इनका बसेरा झारखंड राज्य के गढ़वा में है। कला विषय में स्नातक तक शिक्षित सुजीत कुमार की लेखन विधा- कविता,कहानी,लघुकथा,उपन्यास,निबंध, संस्मरण इत्यादि है। कुछ वेबसाईट पर आपकी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है। ब्लॉग और सोशल मीडिया पर भी लिखते रहते हैं।

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