धर्म और संस्कृति को बचाईए

संजय जैन 
मुम्बई(महाराष्ट्र)

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कितना कुछ इस पंचम काल या कलयुग में होगा या जो हो रहा है,इसे भगवान की वाणी में कहा गया कि,`पंचम काल या कलयुग में मनुष्य का विवेक खत्म हो जाएगा। वह पशु जैसी सोच रखेगा।` यह बात सच साबित हो गई है और हम सब जैन इसको साबित कर रहे हैं। रात में ५० वर्ष की महिलाएं `किटी सदस्य` बनकर होटल में खाना खा रही हैं। शाकाहारी होटल है या नहीं,यह पता करने की कोशिश ही नहीं करती। २० से ३५ साल की महिलाएं सूट,पार्टी गाउन और जींस पहनकर ससुराल में आधुनिक बनकर घूमती हैंl किसे दिखाना है यह सब,और क्यों ? क्या साड़ी पहनी औरत पढ़ी-लिखी नहीं हो सकतीl यह दिमाग की एक गंदगी है,और दूसरी महिलाओं को छोटी मानसिकता व उनके परिवार को रुढ़िवादी बताना है। मैं उन पतियों की सोच को भी सलाम करना चाहता हूं,जो घर की औरतों की नुमाइश लगवाते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि,दूसरे की पत्नी भी गलत पहने हुए और वो अच्छी लग रही है। आश्चर्यजनक है कि,आप कपड़े के पहनावे को प्रतिष्ठा मान रहे हैं। धर्म,ज्ञान,और सादगीपूर्ण व्यवहार का कोई महत्व नहीं है। जब माता-पिता बच्चों के सामने ऐसा व्यवहार पेश करेंगे,तो बच्चे प्रेम विवाह,अंतरजातिय विवाह और ज्यादा आधुनिक लड़कियों से शादी करेंगे,जो शायद और छोटे कपड़े पहने,एवं आपकी बिल्कुल इज्जत न करे,साथ ही कल आप उसे कुछ न कह पाएं। उसको रोकने का हक नहीं होगा,वो उसके लिए आधुनिकता होगी। ये सब करके हम लोग विनाशता की ओर ही चले जा रहे हैंl कहाँ इसका अंत होगा,पता नहींl सुखी जीवन के लिए धर्म को समझें,अपनी तस्वीर खींचकर सार्वजनिक मत कीजिएl आप किसी सामाजिक माध्यम पर उसे लगाकर के महान नहीं बन रही हैं,आपको कोई सम्मान जनक पुरस्कार नहीं मिला हैl आप उठते-बैठते,खाते-पीते और नहाते की भी तस्वीर डाल रहे हैं,इसका मतलब है आपके पास पूरे दिन कोई काम नहीं है,या आपकी सोच-समझ विकसित नहीं हैl तभी तो समाज का नाम रोशन करने की जगह लोग यह कहें कि जैन में ऐसा होता है। कहां तप, त्याग,संयम की बात और कहां कुछ अपवाद स्वरूप लोग जैन धर्म को बदनाम करने में लगे हैं। अभी भी वक्त है कि, अपनी सोच और अपने आप को जैन संस्कारों के अनुसार जीने की कोशिश करें,वर्ना आपकी संतान आपको क्या बोलेगी,या क्या-कुछ करेगी,पता नहींl इससे हमारे संस्कार और धर्म की संस्कृति भी लुप्त हो जाएगी,और इसका दोष हम और आप किसे देंगे ? ये सोचते ही रहेंगे,इसलिए समय को समझते हुए हमें और आपको निश्चित ही अपने परिवारों में और समाज में कुछ कठोर कदम उठाने होंगे,तभी हम अपनी धर्म और संस्कृति को बचा सकते हैंl

परिचय-संजय जैन बीना (जिला सागर, मध्यप्रदेश) के रहने वाले हैं। वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। आपकी जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६५ और जन्मस्थल भी बीना ही है। करीब २५ साल से बम्बई में निजी संस्थान में व्यवसायिक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। आपकी शिक्षा वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ ही निर्यात प्रबंधन की भी शैक्षणिक योग्यता है। संजय जैन को बचपन से ही लिखना-पढ़ने का बहुत शौक था,इसलिए लेखन में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अपनी लेखनी का कमाल कई मंचों पर भी दिखाने के करण कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इनको सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के एक प्रसिद्ध अखबार में ब्लॉग भी लिखते हैं। लिखने के शौक के कारण आप सामाजिक गतिविधियों और संस्थाओं में भी हमेशा सक्रिय हैं। लिखने का उद्देश्य मन का शौक और हिंदी को प्रचारित करना है।

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