धर्म निरपेक्ष पुल

सुनील जैन `राही`
पालम गांव(नई दिल्ली)

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देश में धर्म निरपेक्षता की बाढ़ केरल की बाढ़ से भी भयंकर है। हर कोई धर्म निरपेक्ष कहलाना पसंद कर रहा है। जो कट्टर है वो भी,और जो तलवार लिए है वह भी। लेकिन हद तो तब हो गई,जब कहा गया कि धर्म निरपेक्ष पुल गिर गया। भाई धर्म निरपेक्ष पुल कैसे हो सकता है। व्‍यक्ति हो सकता है,समाज हो सकता है,लेकिन निर्जीव वस्‍तु तो धर्म निरपेक्ष और धर्म भीरू या धर्म परायण नहीं हो सकती।
देश धर्म निरपेक्षता के अकाल से जूझ रहा है। इस अकाल को दूर करने का ठेका अब पुलों ने ले लिया है। पुल सबसे बड़े धर्म निरपेक्ष हैं। वे सरकार देखकर नहीं गिरते। सरकार किसी की भी हो,वे गिर पड़ते हैं।

पुल के गिरते ही सहिष्‍णुता की बाढ़ आ जाती है। राहत सामग्री की खेप आते-आते गिरे पुल के दूसरे सिरे तक नहीं पहुंच पाती और इसीलिए दूसरी खेप की तैयार में लोग जुट जाते हैं। पहली खेप पुल के इस पार ही खप जाती है।
पुल के गिरते ही टोपियां इकटठा होती हैं। टोपियों की संख्‍या बताती है,चुनाव कितनी दूर है। अगर चुनाव दूर है तो टोपियां कम होंगी और अगर चुनाव नजदीक हैं तो टोपियां ज्‍यादा।
पुल अगर शहर के बाहर गिरा है तो केवल पीली टोपियां दिखाई देती हैं। पीली टोपियां मजदूर का प्रतीक है। जब पुल शहर में गिरता है तब टोपियों के रंग से पता चलता है कि पुल धर्म निरपेक्ष था या साम्‍प्रदायिक। पुल निरपेक्ष ही होते हैं। इलाका तय करता है कि पुल को धर्म निरपेक्ष कहा जाए या साम्‍प्रदायिक। पुल जोड़ने के लिए बनाया जाता है,लेकिन पुल गिरते ही जुड़े संबंध टूट जाते हैं। संबंध भी पुलों की तरह होते हैं।
पुल निर्माण के समय वह धर्म निरपेक्ष या साम्‍प्रदायिक नहीं होता। बनने के बाद भी नहीं होता। जब पुल गिर जाता है तब उसके धर्म निरपेक्ष-7साम्‍प्रदायिक होने पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगता है। जांच में पु‍ल के धर्म निरपेक्ष या साम्‍प्रदायिक होने की बात होती है। पुन निर्माण में इस्‍तेमाल की गई सीमेन्‍ट कितना,रेत कितनी,चूना कितना लगाया,इस पर चर्चा नहीं होती।
पुल निर्माण से पहले और बाद तक,पुल पूरी तरह धर्म निरपेक्ष होता है। पुल निर्माण के ठेके के समय यह नहीं देखा जाता-किसने ठेका लिया,बल्कि यह देखा जाता है, किसके ठेका लेने से फायदा अधिक होगा। पुल निर्माण में मजदूर,अभियंता,कामगारों की जातियां नहीं देखी जाती हैं। सबकी एक ही जाति होती है,वह पेट के लिए दो रोटी कमाना। जिस पुल के गिरने से राजनीतिक भूचाल आ जाए तो उसका महत्‍व तो अपने-आप ही बढ़ जाता है। धर्म निरपेक्षता वह शिखंडी है,जिसकी आड़ में एक भीम दूसरे भीम को सत्ता के लिए मारना चाहता है।
पुल गिर गया। पुल गिरने के बाद मालूम पड़ा कि यह पुल धर्म निरपेक्ष था। इसका सिरा मंदिर के पास था, दूसरा सिरा मस्जिद के पास। लोगों ने इस पुल का इसीलिए निर्माण किया था,जिससे दोनों में सदभाव बढ़ेगा-बनेगा। पुल के गिरते ही पुल के सदभावी होने पर लोग उंगली उठने लगे।
पुल कहीं भी गिरे, पुल गिरते हैं और गिरते रहेंगे। जन-धन हानि होती है,होती रहेगी। केवल उन पुलों के गिरने का महत्‍व है,जिनमें जन-धन हानि के बजाय मत की हानि की संभावना अधिक रहती है।

परिचय-आपका जन्म स्थान पाढ़म(जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद)तथा जन्म तारीख २९ सितम्बर है।सुनील जैन का उपनाम `राही` है,और हिन्दी सहित मराठी,गुजराती(कार्यसाधक ज्ञान)भाषा भी जानते हैं।बी.कॉम.की शिक्षा खरगोन(मध्यप्रदेश)से तथा एम.ए.(हिन्दी,मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया है। पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन खाते में-व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी है।आपकी कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में लेखनी का प्रकाशन होने के साथ आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। राही ने बाबा साहेब आम्बेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया है। मराठी के दो धारावाहिकों सहित करीब १२ आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं,रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ४५ से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वविद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैं। कुछ अखबारों में नियमित व्यंग्य लेखन करते हैं। एक व्यंग्य संग्रह अभी प्रकाशनाधीन हैl नई दिल्ली प्रदेश के निवासी श्री जैन सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रीय है| व्यंग्य प्रमुख है,जबकि बाल कहानियां और कविताएं भी लिखते हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-पीड़ा देखना,महसूस करना और व्यक्त कर देना है।

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