धान के खेत

नवल पाल प्रभाकर
झज्जर(हरियाणा)
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पानी से भरे धान के खेतों में,
हरियाली ऐसी छाई है।
धरा बन नई-नवेली दुल्हन,
आसमां से मिलने आई है।
आंखों में काजल,तन पर गहने,
छलकती खुशी वस्त्र हरे पहने।
नाक में नथ,उजला-सा चेहरा,
मांग हरियाली से सजाई है।
धरा बन नई-नवेली दुल्हन,
आसमां से मिलने आई है॥
ठंडी तेज हवा ने इसको,
और भी सुन्दर बना दिया।
महका दिया इसके तन को,
जैसे नहा के इत्र में आई है।
धरा बन नई-नवेली दुल्हन,
आसमां से मिलने आई है॥

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