धारावाहिक ‘सीआईडी’ विदा

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
*******************************************************
दोस्तों,आज चर्चा का विषय है लगातार २१ साल तक साथ चलने वाला टेलीविजन धारावाहिक ‘सीआईडी’। इस अपराध खोजी सीआईडी से देश का बच्चा-बच्चा वाकिफ है। इस नाटक ने हमारे सामने शैशव अवस्था से जवानी तक का २१ साल का सफर तय किया है।
इस प्रसारण अवधि में हर किरदार जनमानस में दिल तक में घर कर गए थे।
२१ जनवरी १९९८ को पहला अंक प्रसारित हुआ था । लगभग २१ साल पहले और आखरी एपिसोड २७ अक्टूबर को आया है।
अब तक कुल १५४६ अंक प्रसारित हो चुके हैं। शो के बंद होने की बात दयानंद शेट्टी ने मुंबई में एक साक्षात्कार में कही है। शो के निर्माता वी.पी. सिंह ने बताया कि शो निर्माता औऱ चैनल का तालमेल नहीं बैठ पा रहा तो शूटिंग अनिश्चितकालीन रोक दी गई है।
इस शो के मुख्य किरदार शुरू से ही शो से जुड़े हुए थे और अंत तक जुड़े रहे हैं।
सबसे पहले एसीपी प्रद्युम्न यानी शिवाजी साटम,
जो अजीब-अजीब चेहरे की भाव भंगिमाओं के साथ शक करते रहते थे। इनका संवाद ‘कुछ तो गड़बड़ है’  देश में इतना प्रसिद्ध है कि सोशल मीडिया तक पर अपनी छाप छोड़ चुका है। साथ ही पिछले २० साल में इनकी पदोन्नति न होने पर भी तरह-तरह से सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाया गया था। बहरहाल मज़ाक अपनी जगह है,औऱ उस संवाद की प्रसिद्धि अपनी जगह है। शिवाजी साटम और निर्माता वी.पी. सिंह इसके पहले भी कई प्रोजेक्ट्स साथ में कर चुके थे।  इसमें मुख्य मराठी शो १०० (एक शून्य शून्य) भी शामिल था तो दोनों की दोस्ती और विश्वसनीयता बड़े स्तर पर थी।
दूसरा किरदार है वरिष्ठ सब इंस्पेक्टर अभिजीत।  आदित्य क्षीवास्तव ने इस किरदार का निर्वहन किया।   निर्माता श्री सिंह ने इन्हें (राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म
 ‘सत्या’  में देखा और प्रभावित) न्योता दे दिया।आदित्य ऑडिशन देने पहुँचे,निर्माता उन्हें कास्ट करने का मन बना चुके थे तो छोटी-मोटी कार्यवाही को अंजाम देते हुए कास्टिंग तय हो गई। पहले आदित्य को २६ अंक के लिए लिया गया था। १९९८ में आदित्य ने कई फिल्मों में भी काम किया जिसके लिए उन्हें शो के निर्माता ने न केवल रियायत दी,बल्कि सहयोग भी किया। साथ ही उन्हें आने-जाने की पाबंदी से भी मुक्त रखा,लेकिन बाद में आदित्य इस किरदार की जीवन्तता महसूस करने लगे थे,तो वह यहीं के होकर रह गए।
 यह एकलौते किरदार थे पूरे शो में,जिनकी प्रेम कहानी भी साथ-साथ चलती है। डॉ. सालुंके की जूनियर डॉ.तारीका (फोरेंसिक एक्सपर्ट) पर इंसपेक्टर आदित्य रीझे हुए थे। ये मन ही मन प्रेम करते हैं,जिसे बड़ी शराफत और नफासत से शो में पेश किया गया था।
तीसरा किरदार वरिष्ठ इंस्पेक्टर दयानन्द शेट्टी उर्फ दया है। असल जिंदगी में भी दयानन्द शेट्टी यानि दया दरवाज़ा तोड़ने में माहिर थे। जब भी शो का कोई खलनायक या लाश कमरे में बंद होती थी तो एसीपी  दया को दरवाज़ा तोड़ने के लिए निर्देश देते थे।
दयानंद शेट्टी को क्रू सदस्य संजय शेट्टी ने रंगमंच के नाटक के मंचन पर देखा,जिसमें दया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से नवाजा गया था। संजय इस अदाकार से खासा प्रभावित थे,तो ऑडिशन की दावत दे डाली। दया पहुँचे तो ५ मिनट की चर्चा के बाद किरदार अंतिम रूप में आ गया।
चौथा किरदार था दिनेश फड़नीस यानी इंस्पेक्टर फ्रेडरिक्स। यह किरदार अपनी बेवकूफाना हरकतों के लिए जाने जाते थे। यह भी एकमात्र किरदार था जो कि इस चिरगम्भीर शो में हास्य का तड़का भरता था।
अगले किरदार थे डॉ. सालुंके असल नाम नरेंद्र गुप्ता, जो फोरेंसिक विशेषज्ञ थे। उनकी और एसीपी की दोस्ती बड़ी पुरानी होने के साथ-साथ एक विशेष प्रभाव से जुड़ी हुई बताई गई है। दोनों के मतभेद २१ साल से देखते आ रहे हैं,जिसमें डॉ. सालुंके टेस्ट ट्यूब में एक बूंद केमिकल डालकर लाल,नीले रंगों का प्रयोग करते दिखते रहते थे।
टीवी इतिहास में ७ नवम्बर २००४ को एक अंक १११ मिंनट का एक शॉट में लिया गया था। बिना कट एवं  बिना री-टेक के एक शॉट में बनाए गए इस अंक को नाम दिया गया था -द इन्हेरीटेन्स।
इस अंक के कारण शो का नाम लिम्का बुक और  गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज है।
देश में ७ जुलाई २००६ से टेलेंट हंट के ज़रिए एक मुहिम शुरू की गई ऑपरेशन तलाश,जिसमें नई सीआईडी टीम बनाना मकसद था। इसमें एक नया किरदार दल में जुड़ा,जिसका नाम था विवेक वी मशू जिन्हें शो में सब इंस्पेक्टर विवेका का किरदार दिया गया था।
इस २१ वर्ष की टेलीविजन जगत की गौरवगाथा को २७ अक्टूबर २०१८ को विराम लग गया है,वह भी तकनीकी कारणों से। सबसे अच्छी एक बात यह कि कोई अपराध ऐसा नहीं रहा,जिसकी जांच में सीआईडी खरी न उतरी हो।
 परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

Hits: 6

आपकी प्रतिक्रिया दें.