धोखा

रणजीतसिंह चारण `रणदेव`
मुण्डकोशियां ( राजस्थान)
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अपनी हो तो बात करो।
दिल में हो तो साथ करोll

 

मोती को जो मार सके,
उसकी पूरी रात करोl

 

यारों चाहो लाख म’गर,
पर कब तो परभात करोl

 

दिल ने चाहा चूम गए,
फिर कैसे औकात करो।

 

बिन सोंचे तुम डूब लिए,
अब कै छोटी आंत करो।

 

पहले अपना कह सनम,
अब कैसे परजात करोl

 

ये जिंदगी कब लौट चले,
इकवारा ना घात करोl

 

कर दी इक दिल जान रजा,
अब ना इसका खात करो।

 

ऐसे ना चाहो कि `रणे`,
तुम मुझको एकांत करोll

(इक नजर यहाँ भी: कै-क्या;कैसे,इकवारा-एक बार, परभात-प्रभात (शुरूआत),परजात-दूसरी जात (भिन्न जात-जाति)और रणे-मेरी छाप है)

परिचय-आपका निवास वर्तमान में जिला-राजसमंद के मुण्डकोशियां (तहसील आमेट) में है। रणजीतसिंह चारण `रणदेव` का जन्म १५ जून १९९७ को पच्चानपुरा (भीलवाड़ा, राजस्थान) में हुआ है। लेखन में उपनाम `रणदेव`लगाते हैं। आप बीएससी में अध्ययनरत हैं। लेखन विधा कविता,गीत ग़ज़ल,कहानी,दोहे,मुक्तक तथा कुण्डलिया है। विविध पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-आमजन तक अपना संदेश पहुंचाना और समाज हित है। राजस्थान राज्य के मुण्डकोशियां के शहर के श्री सिंह कार्यक्षेत्र और सामाजिक गतिविधि में स्वयं का गैर सरकारी संगठन चलाते हैं,जिसका कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान है। यही इनकी उपलब्धि है। आपको प्राप्त सम्मान में काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान-२०१७ सहित पत्रिका सम्मान आदि हैं।

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