…नफरत को ढहाता कौन है

सलिल सरोज
नौलागढ़ (बिहार)

********************************************************************

तुम चले गए तो ये अहसास हुआ मुझे,
ज़िन्दगी भर यूँ भी साथ रहता कौन है।

सबको यही इल्म था कि सभी सही हैं,
ज़माने में गलत को गलत कहता कौन है।

खून में गर्मी बढ़ गई है इस कदर कि अब,
बात गर छोटी भी हो तो सहता कौन है।

ऐसे तो सारे ही सुखनबार है हमारे यहाँ,
मुद्दा है कि बुरे वक्त में हमें चाहता कौन है।

खड़ी तो कर दी सबने ही मिल के दीवार,
देखना ये है कि नफरत को ढहाता कौन है॥

परिचय-सलिल सरोज का जन्म ३ मार्च १९८७ को बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)हुआ है। आपकी आरंभिक शिक्षा कोडरमा (झारखंड) से हुई है,जबकि बिहार से अंग्रेजी में बी.ए तथा नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए सहित समाजशास्त्र में एम.ए.भी किया है। एक निर्देशिका का सह-अनुवादन,एक का सह-सम्पादन,स्थानीय पत्रिका का संपादन एवं प्रकाशन किया है। सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र ही आपकी सम्प्रति है। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिशकरते हैं। ३० से अधिक पत्रिकाओं व अखबारों में इनकी रचनाओं का निरंतर प्रकाशनहो चुका है। भोपाल स्थित फॉउंडेशन द्वारा अखिल भारतीय काव्य लेखन में गुलज़ार द्वारा चयनित प्रथम २० में आपको स्थान मिला है। कार्यालय की वार्षिक हिंदी पत्रिका में भी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।

Hits: 5

आपकी प्रतिक्रिया दें.