नमन वतन को नमन

चन्द्रवीर सोलंकी ‘निर्भय’
आगरा(उत्तरप्रदेश)
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नमन वतन को नमन,हमारा, 

नमन वतन को नमनl 
खिले हजारों फूल चमन में, 
कली-कली को नमनl 
 
नमन चमन को नमन,हमारा, 
नमन चमन को नमनl  
आज़ादी की शुभ बेला पर,
करूँ सभी को नमनl 
 
नमन हमारा सबसे पहले,
 उस योद्धा,बलधारी कोl  
जिसने अपनी जान लड़ा दी, 
पाने इस आज़ादी कोl  
 
हर ऐसे योद्धा की जननी, 
वीर नारी को नमनl 
नमन वतन को नमन…ll 
 
हिला गया जो चट्टानों को, 
वो तूफानी झोंका थाl  
जिसने अंग्रेजों के बल को, 
निज बाजू पर तौला थाl  
 
नमन वीर मंगल पाण्डे को, 
बार-बार हर बार नमनl 
नमन वतन को नमन…ll 
 
जिसने दुश्मन के घर घुसकर, 
शेरों-सी हुंकार भरीl  
भून दिया लालों का कातिल, 
चौराहे पर लाश पड़ीl  
 
मतवारे उस आज़ादी के, 
हरकारे को नमनl 
नमन वतन को नमन…ll 
 
नायक वो आज़ाद हिन्द के, 
कैसे भुला सकेंगे हमl  
जिसने सैन्य शक्ति के बल पे, 
फहराया अपना परचमl  
 
नाम सुनें झुक जाएं मस्तक, 
वीर बोस सौ बार नमनl  
नमन वतन को नमन…ll 
परिचय-चन्द्रवीर सोलंकी का उपनाम ‘निर्भय’ है। इनकी जन्म तारीख १० जुलाई १९७२ तथा जन्म स्थान कागारौल (आगरा)है। आप सम्प्रति से सरकारी शाला में प्रधानाचार्य हैं। उत्तर प्रदेश के शहर आगरा में निवासरत श्री सोलंकी की शिक्षा एम.ए.(हिन्दी) सहित बी.एड., पत्रकारिता में परास्नातक डिप्लोमा है। एक पत्रिका के संचालन से भी जुड़े हुए हैं। सामाजिक क्षेत्र में आप समाज सुधारक के रुप में सक्रिय रहते हैं। निर्भय की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,दोहा,चौपाई, छंदबद्ध रचना,निबंध,आलेख एवं वार्ता आदि है। श्रंगार तथा वीर रस में गीत रचना आपको अधिक पसंद है। प्रकाशित पुस्तकों में-सर्द रातों की दहक(ग़ज़ल संग्रह) तथा अप्रकाशित में-गोगा रामायण (दोहा व चौपाई में सम्पूर्ण कथा अर्थ सहित)है। २ ग़ज़ल संग्रह एवं १ गीत संग्रह सहित गुरु गोरखनाथ जी की जीवनलीला (रामायण की तर्ज)भी अप्रकाशित है। सम्मान के रुप में राष्ट्रीय राजीव गाँधी युवा कवि अवार्ड (१९९२)मिला है। विशेष उपलब्धि-हिन्दी के उत्थान हेतु जागरूकता है। इनके लेखन का उद्देश्य युवा वर्ग को ऐतिहासिक ज्ञान देकर आगामी खतरों से आगाह करना,देशप्रेम व मानवता का उत्थान करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज पूज्य माताजी व पिताजी हैं। काव्य कला की हर विधा में लेखन की विशेषज्ञता है। कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ भी करते हैं।

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