‘नर्मदा यायावर’ अमृतलाल वेगड़ का निधन

१९७७ में ५० वर्ष की उम्र में भी की थी माँ नर्मदा की पदयात्रा 

जबलपुर।

प्रस‍िद्ध चि‍त्रकार,लेखक और ‘नर्मदा यायावर’ अमृतलाल वेगड़ का शुक्रवार सुबह जबलपुर में न‍िधन हो गया। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत श्री वेगड़ कुछ समय से अस्वस्थ थे।

अमृतलाल वेगड़ का जन्म ३ अक्टूबर १९२८ में जबलपुर (मध्यप्रदेश) में हुआ। १९४८ से ५३ तक आपने शान्त‍ि न‍िकेतन में कला का अध्ययन क‍िया। आपकी पहचान खंडों में नर्मदा की पूरी परिक्रमा करने एंव नर्मदा पदयात्रा वृत्तांत की ३ पुस्तकें ह‍िन्दी,गुजराती,मराठी,बंगला, अंग्रेजी और संस्कृत में प्रकाश‍ित होने से है। गुजराती और ह‍िन्दी में साह‍ित्य अकादमी पुरस्कार एवं महापंड‍ित राहुल सांकृत्यायन जैसे अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी आप सम्मानित हुए हैं। श्री वेगड़ ने नर्मदा और सहायक नदियों की ४००० क‍िलोमीटर से भी अध‍िक की पदयात्रा की। पहली बार १९७७ में ५० वर्ष की अवस्था में भी नर्मदा की पदयात्रा में न‍िकले और ८२ वर्ष की आयु तक जारी रखी। ‘सौंदर्य की नदी नर्मदा’ आपकी प्रस‍िद्ध पुस्तक है,साथ ही ‘अमृतस्य नर्मदा’ और ‘तीरे-तीरे नर्मदा’ पुस्तकें भी छपीं हैं। ‘नर्मदा तुम क‍ितनी सुंदर हो’ पुस्तक २०१५ में प्रकाश‍ित हुई थी। श्री वेगड़ अपने जीवन में माँ रेवा के ऎसे परम सेेवक बने,जिन्होंने माँ रेवा को साहित्य में जीवंत करके जनमानस को सरलता से समझाया। गुजराती तथा हिन्दी भाषा पर अधिकार रखने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार श्री वेगड़ का निधन बड़ी क्षति है। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नर्मदा पुत्र के देवलोक गमन पर हिन्दी भाषा . कॉम परिवार गहरा शोक व्यक्त करता है। ‘नर्मदा यायावर’ श्री वेगड़ को सादर श्रद्धासुमन अर्पित।

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