नवाज़ शरीफ,तुम्हें भी ले डूबेंगे

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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                       एक व्यक्ति की डूबने से मृत्यु हुई। जब उसकी लाश बाहर लाई गई,तब पुलिस और चिकित्सक की रिपोर्ट पर घटना का विश्लेषण होता है। अधिकतर डूबने के कारण तीन ही होते हैं-पहला दुर्घटना,दूसरा हत्या या तीसरा आत्महत्या। अब निर्णय में चिकित्सक की रिपोर्ट पर पुलिस प्रकरण दर्ज़ करती है।
मुंबई कांड को हुए लगभग १० वर्ष हो रहे हैं,और इस दौरान गंगा का कितना पानी बह गया। सब सबूत होने के बाद पाकिस्तान सरकार इस बात पर सहमत नहीं थी कि,यह घटना या दुर्घटना उसके द्वारा या उसके यहाँ पाल-पोस रहे आतंकवादी संगठन द्वारा की गई,पर पाकिस्तान सरकार शुरु से ही साफगोई से इंकार करती रही,उसका कारण भी लाज़िमी था। कारण तत्समय सरकार मुल्ला,मौलवी,सेना,उग्रवादी,आईएसआई और अमेरिका के इशारे पर चलती थी। वहां प्रजातंत्र कब रहता है और कब खतम हो जाता है,वहां की सरकार को ही नहीं पता रहता है। वहां यह भी पता रहता है कि,सरकार निर्वाचित है या सैनिक सत्ता की है। राजनेता बिना मुल्ला,मौलवी आतंकवादी गुट,उग्रवादी, आईएसआई और अमेरिका के इशारे पर निर्णय ले ले,जैसे वर्तमान में चीन की गोद में खेल रहा है,सम्भव नहीं है। अमेरिका द्वारा प्रतिबन्ध लगाने के बाद  आतंकवादी गुटों का सरकार कुछ नहीं कर पा रही है,और न कर सकती है। कारण वे बिना मुकुट के शासक हैं। उनकी सत्ता और संगठन बहुत शक्तिशाली है,तथा बनाया भी गया है उन्हीं राजनेताओं ने।
अब तो वहां इन संगठनों को चुनाव लड़ने की मान्यता भी मिल गई है। इसके बाद वे अधिकृत होकर आतंकवाद फैलाने के लिए समर्थ होंगे। दरअसल,पूर्व शासक नवाज़ शरीफ के पंख पूरे तरीके से काट दिए गए या कट गए हैं। उनका कब
जेल आना-जाना हो जाए,तय नहीं है-जैसे मुशर्रफ का। कौन किसके निगाहें करम पर ज़िंदा है,पता नहीं पर ज़िंदा है तो भई मरे समान। अब इनकी संपत्ति की जब्ती और इनका राजनीतिक भविष्य अनिश्चित है। इस कारण नवाज़ शरीफ ने बड़े दुःसाहस का काम किया यानी उन्होंने कबूला कि मुंबई काण्ड में  पाकिस्तान का हाथ है,और उनके
द्वारा पाले गए आतंकवादियों ने उनके संरक्षण में काम किया। इन्होंने यह बहुत बड़ी बात कहकर अपनी जान जोखिम में डाल ली है,और कहीं इतिहास की पुनरावृति न हो जाए।
वैसे,पाकिस्तान इस मामले में बहुत खुशनसीब है कि वह अपनी ऐतिहासिक परम्परा का पालन करता है,जैसे शाहजहां,औरंगज़ेब अकबर आदि की विरासत को संजोए रखा है। और क्या करें, क्योंकि सत्ता का सुख और खून ऐसा ही होता है वह दूसरे को बर्दाश्त नहीं करता है।
                      इस बयान के बाद नवाज़ शरीफ का भविष्य कितना सुनहरा या अंधकारमय होता है,वह तो भविष्य ही बताएगा,पर उन्होंने अपने हाथ से अपने पैर पर कुल्हाड़ी क्यों पटकी,यह शोध का विषय है। हालांकि,ये वर्तमान में वैसे ही सुरक्षित नहीं थे और अब उन्होंने आतंकवादियों को छेड़कर अपनी जान के खतरे का न्योता दिया है। उन्होंने समझ लिया कि,हम तो डूबेंगे सनम और तुम्हें भी ले डूबेंगे। बस अब पाकिस्तान में तेल और तेल की धार देखनी है।
परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी() आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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