नव पीढ़ी उदास

ऋषभ तोमर ‘राधे’
मुरैना(मध्यप्रदेश)
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सब लूट लिया धरा का,लेकिन मनु की मिटती है नहीं प्यास,
दूषित आलम को देख-देख नव पीढ़ी जग की सब उदासl

उजड़े वन,पर्वत टूट गए वसुधा के हौंसले छूट गए,
हरियाली घर की शोभा थी,कांक्रीट महल सब लूट गएl
कटते वन महलों की खातिर जिससे होता जग का ह्रास,
दूषित आलम को देख-देख नव पीढ़ी जग की सब उदासll

धरती का जल भी सूख गया,विष भू पर छाया चारों ओर,
कोयल का स्वर भी हुआ शांत,व्याकुल लगते हैं सारे मोरl
तब वृक्षारोपण बचता है भू-रक्षा एक उपाय खास,
दूषित आलम को देख-देख…ll

कांक्रीट महल अब वन से है उद्योगों का होता विस्तार,
हरियाली पानी वायु की जग में होती है रोज हारl
क्योंकि,मानव जीवन सारा बन बैठा पॉलिथीन दास,
दूषित आलम को देख-देख…ll

धरती का कलेजा चीर रहे खनिजों की खातिर यंत्र अपार,
नित होते हैं जग में साथी,परमाणु के नव अविष्कारl
मानव दानव का रूप लिए जंगल का करता जाता नाश,
दूषित आलम को देख-देख…ll

भू जल से औऱ भोजन से होता जहरीला यह संसार,
इसलिए निवेदन तुमसे है आदत बदलो अब एक बारl
नित पेड़ लगाओ,जीवन में अब बचा उपाय यही खास,
दूषित आलम को देख-देख नव पीढ़ी जग की सब उदासll

सब लूट लिया धरा का,लेकिन मनु की मिटती है नहीं प्यास,
दूषित आलम को देख-देख नव पीढ़ी जग की सब उदासll

परिचय-ऋषभ तोमर मध्यप्रदेश के शहर अम्बाह (जिला मुरैना) में रहते हैं। उपनाम ‘राधे’  है। इनकी जन्म तिथि १४ अक्टूबर  १९९७ है। आपने स्नातक (गणित) किया हुआ है।  लेखन विधा -गीत  है । इनके लेखन का उद्देश्य मानसिक संतुष्टि है।

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