नहिं करें कोई भी अपराध

आदेश कुमार गुप्ता `पंकज`
 रेणुसागर(उत्तरप्रदेश)

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राम और सिय का हुआ देखो आज वियोग।
वन-वन भटकें राम प्रभु कैसा यह संयोग॥

पंकज पावन नीर का करें सदा उपयोग।
इसके सेवन से रहे मानव स्वस्थ निरोग॥

जैसी करनी जो करे वैसा ही फल पात।
पाता मानव है सदा अपना ही अनुपात॥

चाँद सितारे हैं सभी फिर भी नहीं प्रकाश।
सहमा-सहमा दिख रहा धरा और आकाश॥

पंकज दिखता है नहीं तिल भर कहीं प्रकाश।
लगता दिनकर है गया लेकर के अवकाश॥

सोच-समझ के हम करें अपना सदा निवेश।
पंकज बदले सदा यह जीवन अरु परिवेश॥

धरती पर उपलब्ध सब पंकज इतना जान।
करमों के आधार पर पाता है इनसान॥

पंकज जीवन में करें जल का सही प्रयोग।
गन्दा इसको नहिं करें करिए न दुरुपयोग॥

पंकज कभी न कीजिए जान-बूझकर पाप।
निर्धनता को आप सब समझें नहिं अभिशाप॥

दिनकर कैसा हो गया देख आज उद्दंड।
जग में है फैला रहा कैसी आग प्रचंड॥

जान-बूझकर नहिं करें कोई भी अपराध।
जीवन को गति मिलेगी बढ़े सदा निर्बाध॥

परिचय-आदेश कुमार गुप्ता `पंकज` की जन्म तिथि ३० जून १९६३ हैl आपकी शैक्षिक योग्यता एम.ए.(अर्थशास्त्र), एम.एस-सी.(गणित शास्त्र) तथा बी.एड.हैl साहित्यिक उपलब्धि के रूप में २०० से अधिक पत्र-पत्रिकाओं मेंं बाल कविताएं,बाल कहानियाँ तथा अन्य कविताएं प्रकाशित होना हैl आकाशवाणी(लखनऊ) से बच्चों द्वारा आपकी बाल कविताओं का वाचन किया गया है। श्री गुप्ता कवि सम्मेलनों में अध्यक्षता करते हैं और यही सम्मान है। आपके खाते में साझा काव्य संग्रह-दोहा कलश,कस्तूरी कंचन,नूर-ए- ग़ज़ल,कविता अनवरत,काव्य कलश आदि में कविताएं प्रकाशित होना हैl सम्मान के रूप में आपको वैश्य श्री,काव्य कलश सम्मान,काव्य रत्न के साथ ही श्रेष्ठ अध्यापक  का सम्मान(केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा), आगमन सम्मान,हिन्दी साहित्य सेवी सम्मान,प्रतिज्ञा सम्मान,दोहा शतकवीर और कलम की सुगंध सम्मान-२०१८ आदि दिए गए गए हैंl आदेश कुमार गुप्ता `पंकज` का जन्म शाहजहाँपुर के मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ है। मध्यम श्रेणी के छात्र होकर भी आप श्रेष्ठ अध्यापक(गणित शास्त्र) के रुप में स्थापित हुए हैं। काव्य के प्रति शुरू से ही रुझान होते हुए भी स्नातक स्तर पर आने के बाद लिखना प्रारम्भ कियाl आपने बाल कहानियाँ,बाल कविताएँ,गीत,ग़ज़ल तथा हास्य रस की कविताएं भी लिखीं हैं। आपका निवास उत्तर प्रदेश के रेणुसागर सोनभद्र में हैl 

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