नहीं आइना झूठ दिखाये!

पवन गौतम ‘बमूलिया’
बाराँ (राजस्थान)
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युगों-युगों से गीत सुने हैं,
दर्पण सदा सत्य दिखलाये।
नहीं आईना झूठ दिखायेll

मीरा,तुलसी और गालिब ने,
जिसके कोटिश:रूप दिखाये।
नहीं आइना झूठ दिखायेll

मीत निहारे प्रीत पुकारे,
साँस चले अविरल निर्बाध।
मिलन-विरह में देख आइना,
करते हैं केवल संवादll
अल्हड़ नायक की तरूणाई,
मस्त नायिका का प्रतिवाद।
साम्राज्ञी रम्भा सहजादी,
मुकुर करे सबका अनुवादll

तेरा भी दिल धड़का होगा,
कितने हुस्न समाये।
नहीं आइना झूठ दिखायेll

सीसा है पौराणिक वैदिक,
दर्पण जीवन मित्र अभिन्न।
महज काँच का टुकड़ा कैसे ?
इसके बिन श्रंगार विपिन्नll
चाहे इश्क़,अश्क़ हो चाहे,
चाहे रश्क़े हूरे जिन्न।
अरे! मेनका के स्पंदन,
ओ!ओ! पद्मावत पद चिह्नll

तुझे देख हर्षाए उर्वशी,
तू काहे शरमाये।
नहीं आइना झूठ दिखायेll

कौन-कहाँ-कब किसने देखा ?
नायिकाओं के आरूप।
रत्न मणि हीरे,मोती हों,
तू देता सबको प्रारूपll
तुझको कृष्ण निहारा करते,
मात यशोदा अजिर अनूप।
राधा ने भी निरखा होगा,
महारास के अल्हड़ भूपll

मेरा!तेरा! सबका ‘गौतम’,
मन दर्पण कहलाये।
नहीं आइना झूठ दिखायेll

`पवन` राग में जीवन ‘राही’,
मधुर-मधुर धुन गायेl
नहीं आइना झूठ दिखायेll

युगों-युगों से गीत सुने हैं,
दर्पण सदा सत्य दिखलायेl
नहीं आइना झूठ दिखायेll

परिचय –पवन कुमार गौतम का साहित्यिक उपनाम-बमूलिया है। जन्म तारीख ३ जुलाई १९७५ एवं जन्म स्थान-बमूलिया कलाँ जिला बाराँ (राजस्थान)है। वर्तमान में बमूलिया कलाँ तहसील अन्ता जिला बाराँ में ही निवास है। स्थाई पता भी यही है। शिक्षा स्नातकोत्तर (अंग्रेजी, हिंदी, राजस्थानी साहित्य, संस्कृत साहित्य,दर्शन शास्त्र,समाज शास्त्र और राजनीति विज्ञान)एवं शिक्षा स्नातक (बी.एड.)है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। श्री गौतम सामाजिक कार्य के अन्तर्गत  समयानुसार यथासक्ति कार्यों में मदद करते हैं। इनकी लेखन विधा-कविता, गीत, छन्द, मुक्तक, रूबाई, ग़ज़ल, सजल, गीतिका,नज़्म तथा कव्वाली है। ओज रस की कविताओं का काव्य संकलन प्रकाशाधीन है,तो अनेक पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। आपको विद्यालय एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों सहित कोटा शैक्षणिक मंच तथा साहित्यिक मंचों से भी सम्मानित किया गया है। विशेष उपलब्धि में संगीत- गायन विधा में पारंगत होना है। आप वैदिक संस्कृत,पांडित्य एवं ज्योतिष में अध्ययनरत हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-स्वान्त सुखाय एवं परम चेतना की अनुभूति के साथ ही प्रकृति के साथ सामन्जस्य स्धापित करना व मानवीय मूल्यों के महत्व का प्रतिपादन है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता श्रीमती शांति बाई गौतम और पिता बृजमोहन गौतम सहित विष्णु विश्वास दाधीच(कवि-गीतकार), साहित्यिक गुरू स्व. गिरिधारीलाल मालव (हाड़ौती के प्रेमचन्द) एवं धर्म पत्नी सुनीता पंचोली है। इनकी विशेषज्ञता आशु काव्य वाचन व लेखन में है। 

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