‘नानू की जानू’ औसत दर्जे की मनोरंजक फ़िल्म

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
*******************************************************

नानू की जानू’ औसत दर्जे की मनोरंजक फ़िल्म है, जिसमें अदाकार-अभय देओल, पत्रलेखा,मनू ऋषि और बृजेंद्र काला है।
निर्देशक फ़राज़ हैदर की इस फिल्म की
अवधि २.१३ मिनट है। आपने हॉरर फिल्में देखी होंगी,लेकिन यहां एक नया प्रयोग है। हॉरर संग हास्य, हॉलीवुड में इस प्रकार के प्रयोग होते आए हैं, जैसे ‘कैस्पर’ फ़िल्म,लेकिन बॉलीवुड में गिने- चुने प्रयोग ही हुए हैं।
हॉलीवुड में ९० के दशक में एक धारावाहिक आया था ‘जिनी और जानू’,
लेकिन यह एक अनूठा प्रयास हो सकता था अगर पटकथा,कहानी पर और संजीदगी से काम हो जाता तो ??
कहानी के अनुसार आनंद (अभय देओल) उर्फ नानू दिल्ली शहर का छुटभैया गुंडा है,जो मकान खाली कराने का काम करता है,जिसमें उसकी मदद उसका साथ डब्बू (मनू ऋषि) करता है|


एक बार लड़की सिद्धि उर्फ जानू का एक्सीडेंट होता है और जानू (पत्रलेखा)को नानू हॉस्पिटल पहुंचाता है। वह लड़की अंतिम साँसे लेते हुए नानू पर फिदा हो जाती है लेकिन मर जाती है। फिर प्यार को दिल में लिए ही
अब जानू भूतनी बनकर वापस आती है तो नानू के घर में अजीबोगरीब घटनाओं का दौर शुरू होता है। नानू पड़ोसियों की मदद लेता है लेकिन नाकामी से नानू की ज़िंदगी में और हलचल मच जाती है। फिर नानू,जानू के प्यार-सम्मान में खुद को बदल लेता है।
फ़िल्म गुदगुदाते हुए आगे बढ़ती जाती है, लेकिन प्यार को मुकम्मल करने के लिए दुनिया में जिस्म भी ज़रूरी है।
क्या नानू-जानू मिल पाएंगे,सवाल के जवाब के लिए आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी।
इसके गाने औसत हैं और संगीत भी।५ संगीतकारों की खिचड़ी इसमें पका ली गई है। सपना चौधरी का डांस का दांव यहां नहीं चल पाया। कुल मिलाकर फ़िल्म औसत ही है,पर अंत पर और काम किया जा सकता था।
बृजेन्द्र काला,मनू ऋषि हमेशा की तरह ही स्वाभाविक है। अभय नैसर्गिक शैली के अभिनेता हैंतो पत्रलेखा के लिए ज्यादा कुछ काम था नहीं। फराज हैदर को निर्देशन में अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। इस फ़िल्म का तमिल,तेलगु संस्करण पहले ही बन चुका है। इस
फ़िल्म को २.५ सितारे देना सही है।

परिचय इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

Hits: 9

Leave a Response