नारी का संपूर्ण स्वरूप ही नवदुर्गा

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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सच्चाई तो यही है कि नवदुर्गा नारी के नौ स्वरूप महिलाओं के पूरे जीवनचक्र का प्रतिबिम्ब ही हैं,यानि
‘शैलपुत्री’ जन्म ग्रहण करती हुई कन्या कास्वरूप है।
‘ब्रह्मचारिणी’ नारी का कौमार्य अवस्था प्राप्त होने तक का रूप है,वहीं नारी शादी से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने की वजह से ‘चंद्रघंटा’ के समान है। जब महिला शिशु को जन्म देने के लिए गर्भवती बनती है तो वह ‘कूष्मांडा’ का स्वरूप है,वहीं नारी शिशु को जन्म दे देती है तो वह ‘स्कन्दमाता’ बन जाती है। संयम व साधना को धारण करने वाली नारी ‘कात्यायनी’ का स्वरूप हो जाती है। सती-सावित्री के समान अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से नारी ‘कालरात्रि’ जैसी बन जाती है,तो जीवन पर्यन्त अपने परिवार को संसार मानकर उसका उत्थान और उन्नयन करने वाली नारी ‘महागौरी’ हो जाती है। अंत में नारी अपने सभी दायित्वों का निर्वाह करने के बाद धरती को छोड़कर स्वर्गारोहण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि (समस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने वाली ‘सिद्धिदात्री’ बन जाती है।
‘नवरात्र’ शब्द में जीवन का हर पहलू छिपा हुआ है।
नवरात्र दो शब्दों से मिलकर बना है यानि-नव और रात्र। नव का अर्थ है नौ है,वहीं रात्र शब्द में पुनः दो शब्द शामिल हैं-रा+त्रि। ‘रा’ का अर्थ है रात और ‘त्रि’ का अर्थ है जीवन के तीन पहलू-शरीर,मन और आत्मा।
जीवन में प्रत्येक मनुष्य को तीन तरह की विकट समस्याओं का सामना करना होता है,यथा-भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक। इन समस्याओं से जो मनुष्य को जो छुटकारा दिलवाती है वह होती है ‘रात्रि’। रात्रि या रात मनुष्यों को दु:ख से मुक्ति दिलाकर उनके जीवन में यश-सुख-सम्पदा लाती है। मनुष्य कैसी भी परिस्थिति में हो,उसे रात में ही आराम मिलता है। रात की गोद में हम सभी अपने सारे सुख-दु:ख को भुला कर निंद्रा की गोद में चले जाते हैं।

परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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