नोंचने लगे

दिनेश पाठक 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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आदमी की जात की,जमात की बिसात है ये,
साथ तो दिया न साथ-साथ नोंचने लगे।

हाथ होने चाहिए थे,माथ पे अनाथ के वो,
हाथ पाँव पेट पीठ,माथ नोंचने लगे।

दिन-रात शह-मात,बात-बात में बलात,
‌हाथ वो हरेक हाथों-हाथ नोंचने लगे।

माँ-बहन बेटी-भुआ,भाभी मौसी चाची को भी,
जान के अनाथ नागनाथ नोंचने लगे।

परिचय-इंदौर निवासी दिनेश पाठक की जन्मतिथि १५ अप्रैल १९६५ और जन्म स्थान-ग्रा.भिलाड़िया घाट होशंगाबाद(म.प्र.) हैl वर्तमान पता मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित ब्रम्ह बाग़ कालोनी हैl आपकी पूर्ण शिक्षा व्यवसाय प्रबन्ध में स्नातकोत्तर है,जबकि कार्यक्षेत्र जीवन बीमा में हैl श्री पाठक सामाजिक गतिविधि में समाजसेवा के साथ ही अभा कवि सम्मेलन का संयोजन एवं मंच संचालन भी करते हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,छंद,कविता,कहानी और नाटक लेखन हैl आप पठन-पाठन एवं कवि सम्मेलन के लिए सक्रिय रहते हैंl प्रकाशन में गजल संग्रह-`उम्र के अस्तर` प्रकाशन प्रक्रिया में हैl अनेक पत्र-पत्रिकाओं में स्तम्भ एवं नियमित लेखन के रुप में आपकी रचनाएं छपती रहती हैंl आपको प्राप्त सम्मान में दैनिक अख़बार द्वारा `ठिठौली २००० सहित कविराज सम्मान(भोपाल)और अन्य हैंl आपकी विशेष उपलब्धि हास्य और ओज दोनों विधाओं में घनाक्षरी छंद लेखन एवं पाठन में विशेष दक्षता हैl श्री पाठक अभी तक ८०० छंद रच चुके हैं,जो मंचीय होकर भी साहित्यिक मापदंडों पर खरे हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-राष्ट्र जागरण करना धर्म हमारा हैl

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