पतझड़

ललित प्रताप सिंह
बसंतपुर (उत्तरप्रदेश)
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पतझड़ की तरह है तुम्हारा जीवन,
आप चाहो तो सावन बना लीजिए।

दीवाने हैं तेरे इस जहाँ में बहुत,
इस दीवाने को अपना बना लीजिए,
है रास्ते में तुम्हें बड़े कंकड़ मिलेंगे,
आप चाहो तो फूलों-सा सजा लीजिए।
पतझड़ की तरह है तुम्हारा जीवन,
आप चाहो तो सावन बना लीजिए॥

दिल में बसाते हैं सब तुमको बहुत,
आप हमको दिल में बसा लीजिए,
कर दीजिए मेहरबानी इतनी सी बस,
किसी और का होने से बचा लीजिए।
पतझड़ की तरह है तुम्हारा जीवन,
आप चाहो तो सावन बना लीजिए॥

राह भटकी-भटकी-सी हम पा गए,
आकर तेरे घर के करीब आ गए हम,
खड़े हैं तेरे द्वार में प्रतीक्षा में तेरे हम,
आप चाहो तो मेहमान बना लीजिए ।
पतझड़ की तरह है तुम्हारा जीवन,
आप चाहो तो सावन बना लीजिए॥

 

परिचय : ललित सिंह का निवास जिला रायबरेली स्थित ग्राम बसंतपुर (उत्तरप्रदेश)में है ।वर्तमान में बीएससी की पढ़ाई के साथ ही लेखन भी जारी है । लेखन में आपको श्रृंगार विधा में लिखना अधिक पसंद है । कई स्थानीय पत्रिकाओं में आपकी रचना प्रकाशित हुई है । ललित प्रताप सिंह का साहित्यिक उपनाम-ललित है। जन्मतिथि ४ जुलाई १९९९ और जन्मस्थान-होशियारपुर(पंजाब) है।कार्यक्षेत्र में आप विद्यार्थी हैं,तो लेखन विधा-कविता और ग़ज़ल जो श्रृंगार रस में लिखना हैl प्रकाशन में श्री सिंह का साझा काव्य संग्रह शीघ्र ही आने वाला हैl आप ब्लॉग पर भी अपनी बात रखते हैंl आपकी नजर में लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी का प्रचार करना हैl

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