परदेशी बालम

डी.पी. लहरे
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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बालम तुम हो परदेश में,
मेरे कटते नहीं दिन-रैन।
तेरे बिना मेरे साजना,
मेरे भीगे-भीगे दो नैन॥

तेरे आने की दुआ माँगी है,
तुम्हें पाने की दुआ माँगी है।
आती है याद पल-पल पिया,
धड़-धड़ धड़कता है जिया॥

हो के जुदा रह पाऊँ कैसे,
ये दिल को बहलाऊँ कैसे।
आ भी जा इंतज़ार है जानू,
दिल मेरा बेकरार है जानू॥

तन्हा गुजरते हैं,जां मेरे दिन,
अच्छी नहीं दुनिया तेरे बिन।
याद तेरी दिल को छू जाती है,
तुम्हारी याद बहुत रूलाती है॥

आती है याद पल-पल सजना,
तेरी मीठी-मीठी ओ बैन।
तुम्हें देखने से ही आता बलमा,
मेरे उजड़ते दिल को चैन॥
(एक दृष्टि यहाँ भी:बैन-बोलना,कहना,वाणी)

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