परीक्षा परिणाम से नहीं,जिन्दगी है आत्मविश्वास से

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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आज परिणाम आए हैं,और आने वाले समय में भी कई परीक्षा परिणाम घोषित होने वाले हैं। मुख्य रुप से कक्षा १० वीं और १२ वीं के परिणाम को लेकर छात्रों और उनके परिवार में अत्यंत उत्सुकता होती है। उनके सकारात्मक और नकारात्मक स्वरूप को बहुत  गंभीरता से लिया जाता है। बच्‍चों के भीतर यह धारणा घर कर गई है कि वह परीक्षा देने नहीं,बल्कि प्रतिष्‍ठा की जंग लड़ने जा रहा है। उसकी एक गलती उसके परिवार के सम्‍मान,सपनों को चकनाचूर कर देगी। इसका एक दुखद प्रमाण बीते दिनों हमने मध्यप्रदेश में देखा। यहां एक बच्‍चे ने तीन विषय में विशेष योग्‍यता के बाद भी आत्‍महत्‍या कर ली,क्‍योंकि उसके दोस्‍तों और माता-पिता से किए वादों के अनुसार उसे ९० प्रतिशत अंक लाने थे,जबकि वह ७४ प्रतिशत ही ला पाया।  इसलिए,यह बेहद जरूरी है कि कोई भी परिणाम क्‍यों न हो,उसे दूसरे से न जोड़ें। उसमें तुलना के रूखे और जानलेवा रंगों की मिलावट न करें। बच्‍चा आपका है, हर हाल में,सफल और असफल दोनों ही होगा। उसे यह बात आप ही ज्‍यादा अच्‍छे से तथा केवल आप ही समझा सकते हैं,क्‍योंकि वह आपसे ही ज्‍यादा प्‍यार करता है।दरअसल,जब बच्चा १० वीं और १२ वीं कक्षा में पहुंचता है तब अचानक माता-पिता और अध्यापकों का दबाव उस पर बढ़ जाता है,जबकि इस उम्र में शारीरिक व मानसिक बदलावों के साथ-साथ बच्चों में हार्मोनल बदलाव भी हो रहे होते हैं,इसलिए उम्र के इस दौर में बच्चों के साथ ज्यादा सहजता से बर्ताव करने की जरूरत होती है। यह बात जानना बच्चों को भी जरूरी है कि मात्र परीक्षा के परिणाम जिंदगी की दिशा तय नहीं करते,बल्कि उसका भविष्य तय करता है उसका आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच। एक कागज के टुकड़े से किसी की योग्यता और क्षमता को मापना सिर्फ मूर्खता होती है।
परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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