पर्यावरण बचाओ

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’
पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़ 
**************************************************

पेड़ लगाओ मिल सभी,देते हैं जी छाँव।
शुद्ध हवा सबको मिले,पर्यावरण बचाव॥

पेड़ों से मिलती हमें,लकड़ी फल औ फूल।
गाँव गली में छोरियाँ,रस्सी बाँधे झूल॥

पर्यावरण विनाश से,मरते हैं सब लोग।
कहीं बाढ़ सूखा कहीं,जीव रहे हैं भोग॥

जब-जब काटे वृक्ष को,मिलती उसकी आह।
भुगत रहे प्राणी सभी,ढूँढ रहे हैं राह॥

सड़क बनाते लोग हैं,वृक्ष रहे हैं काट।
पर्यावरण विनाश कर,देख रहे हैं बाट॥

पानी डालो रोज के,पौधे सभी बचाव।
मत काटो तुम पेड़ को,मिल-जुल सभी लगाव॥

पंछी बैठे डाल में,फुदके चारों ओर।
चींव-चींव करते सभी,होते ही वह भोर॥

पेड़ों से मिलती हवा,श्वांसों का आधार।
कट जाये यदि पेड़ तो,टूटे जीवन तार॥

माटी में मिलते सभी,सोना-चाँदी हीर,
पर्यावरण बचाय के,समझो माटी पीर॥

दो दिन की है जिंदगी,समझो इसका मोल।
माटी बोले प्रेम से,सबसे मीठे बोल॥

परिचय–महेन्द्र देवांगन का लेखन जगत में ‘माटी’ उपनाम है। १९६९ में ६ अप्रैल को दुनिया में अवतरित हुए श्री देवांगन कार्यक्षेत्र में सहायक शिक्षक हैं। आपका बसेरा छत्तीसगढ़ राज्य के जिला कबीरधाम स्थित गोपीबंद पारा पंडरिया(कवर्धा) में है। आपकी शिक्षा-हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर सहित संस्कृत साहित्य तथा बी.टी.आई. है। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सहयोग से आपकी २ पुस्तक-‘पुरखा के इज्जत’ एवं ‘माटी के काया’ का प्रकाशन हो चुका है। साहित्यिक यात्रा देखें तो बचपन से ही गीत-कविता-कहानी पढ़ने, लिखने व सुनने में आपकी तीव्र रुचि रही है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर कविता एवं लेख प्रकाशित होते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा से प्रकाशित पत्रिका में भी कविता का प्रकाशन हुआ है। लेखन के लिए आपको छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा सम्मानित किया गया है तो अन्य संस्थाओं से राज्य स्तरीय ‘प्रतिभा सम्मान’, प्रशस्ति पत्र व सम्मान,महर्षि वाल्मिकी अलंकरण अवार्ड सहित ‘छत्तीसगढ़ के पागा’ से भी सम्मानित किया गया है। 

Hits: 4

आपकी प्रतिक्रिया दें.