पर्यावरण

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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पर्यावरण सुधार के,स्वच्छ रखो आवास।
होगी शुद्ध हवा तभी,जीवन बीते खासll

पेड़ लगाकर आज से,पर्यावरण सम्हाल।
आक्सीजन भरपूर हो,जीवन मालामालll

वन में छाय बहार हो,पर्वत पे हरियाय।
पर्यावरण रहे तभी,वर्षा खींचे आयll

पानी की हर बूंद में,दुनिया रही समाय।
पर्यावरण बचाय लो,तभी समझ में आयll

पानी तो अनमोल है,पर्यावरण अमोल।
रहे प्रदूषण ना कहीं,करो काम तुम तौलll

सबको जल की कामना,करते हैं सब आस।
पर्यावरण रहे जब,तभी बुझेगी प्यासll 


जल थल नभ भी शुद्ध हो,पर्यावरण सुधार।
आओ मिल के प्रण करें,हों मन से तैयारll

करो सुरक्षा आज तुम,पर्यावरण महान।
इनसे ही मिलता हमें,जीवन प्राण समानll                     
 
शुद्ध हवा सम प्राण है,पर्यावरण उपाय।
मत काटो तुम पेड़ को,निर्जन ना बन जायll

दुनिया की इस भीड़ में,पर्यावरण उजार।
पेड़ लगाकर बढ़ चलो,मानव अब ना हारll

जंगल सूना पेड़ बिन,पक्षी बिन संसार।
जीव जगत सब सून है,पर्यावरण सुधारll

धरती की रक्षा करो,हरा-भरा हो देश।
पर्यावरण बचा लो,सुन्दर हो परिवेशll                            
 
जल बिन सूखी है धरा,तड़प रहा इंसान।
पर्यावरण बिना नहीं,नहीं बचेगी जानll

आओ सब संकल्प लें,पेड़ लगाओ आज।
पर्यावरण रहे धरा,तभी बचेगी लाजll

सुन्दर हरियाली रहे,सुन्दर हो संसार।
करो सुरक्षा पेड़ की,पर्यावरण सुधारll

करो हिफाजत पेड़ की,ईश्वर का वरदान।
पर्यावरण रहे नहीं,सोंचो ऐ नादानll

वृक्ष लगे फलदार हो,मिले सभी को छाँव।
पर्यावरण पहाड़ हो,नगर शहर या गाँवll

पर्यावरण धरा सजे,लगा वृक्ष उपहार।
इनसे रौशन हो जहां,धरती का सिंगारll

मित्र हमारा ये जंगल,रखना इसकी लाज।
पर्यावरण सजाय दो,हवा शुद्ध हो आजll

फूलों से दुनिया सजे,पर्यावरण बचाव।
धरा स्वर्ग सम आज हो,ऐसा देश बनावll

हरी-भरी धरती लगे,सुन्दर दिखे पहाड़।
पर्यावरण सुधार लो,बरगद पीपल झाड़ll

औषध का भण्डार हो,वन उपवन अरु बागl
पर्यावरण रहे सभी,ऐ मानुष अब जागll

वर्षा में पानी गिरे,गर्मी में दे छाँव।
पर्यावरण सुहावना,लगता मेरा गाँवll

शीतल मंद सुगन्ध को,पर्यावरण बचाय।
लगे पेड़ घर-खेत में,स्वर्ग धरा बन जायll

बोधन तू सतकर्म कर,पुण्य काम यह जान।
पर्यावरण बचा के,सेवा करो महानll

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