पहचान चोरी-साइबर आर्थिक अपराध की अहम कड़ी

विशाल सक्सेना
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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आजकल हम सब इन्टरनेट व उससे संबंधित कई सेवाओं का तेज दौड़ने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में भरपूर प्रयोग कर रहे हैं,पर कई बार हम ये भूल जाते हैं कि जब हम साइबर क्षेत्र(दुनिया) में होते हैं तो वहाँ हमें कितना  संवेदनशील रहना है,कितनी सुरक्षा रखनी है व कितनी व्यक्तिगत जानकारी इस पटल पर या अन्य पटल पर साझा करनी है। प्रायः देखा गया है कि,जब हम उल्लास में होते हैं या किसी कार्य के लिए जरूरतमंद होते हैं तो अपने स्वार्थ के लिए हम कई बार वो सब कुछ करने को तैयार होते हैं,जो शायद जरुरी नहीं है।   बहरहाल,कार्य कोई भी हो पर दुर्भाग्यपूर्ण कई बार नतीजा सिफर या नकारात्मक रूप से हमारे सामने आता है। ऐसा ही एक अपराध है ‘पहचान चोरी'(आइडेंटिटी थेफ्ट),जो आज मुख्य रूप से अपराधियों का हथियार बना हुआ है,अपनी पहचान छुपाने के लिए। इसके अंतर्गत एक व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की पहचान अपने निजी फायदे के लिए चुरा सकता है ।
जहाँ तक देखा-पाया गया है कि अधिकतर हम ही दोषी होते हैं। अपनी सारी जानकारी उन तक पहुँचाने के लिए, जैसे कि हम सोशल मीडिया में  साइट्स पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी पोस्ट कर देते हैं। बिना सोचे-समझे हर तस्वीर  साझा कर देते हैं और हर किसी को मित्र बना लेते हैं। हमारे जीवन की मुख्य तारीखें,सभी रिश्तेदारों की जानकारी,  कई बार अनजाने में हम वो सब जानकारी साझा कर बैठते हैं,जिसकी ताक में अपराधी हमसे जुड़कर बैठा है। नतीजतन हमसे जुड़ा एक अपराध जन्म लेता है,जिसकी खबर हमें नहीं होती, जिसमें किसी भी तरह से हमारे नाम के साथ हमारे महत्वपूर्ण दस्तावेज,जैसे-बिजली के बिल,ड्राइविंग लाइसेंस क्र. आधार कार्ड,पैन कार्ड,चित्र,बैंक स्टेटमेंट व अन्य व्यक्तिगत जानकारी का प्रयोग कर हमको प्रतिरुपित किया जाता है। हमारी जानकारी व दस्तावेजों के आधार  पर सोशल साइट्स पर फर्जी खाते (प्रोफाइल) बनाए जाते हैं,मोबाइल सिम जारी करवाई जा सकती है। क्रेडिट कार्ड, वयक्तिगत-व्यापारिक ऋण,बैंक खाता खुलवाने या अन्य  जगह गलत पहचान के रूप में भी इन्हें अपराध में इस्तेमाल किया जा सकता है।
दुर्लभ मामलों में,एक बहुरुपिया झूठी पहचान के सहारे पुलिस को भी गुमराह कर सकता है,जिससे एक आपराधिक रिकॉर्ड बनाने या व्यक्ति जिनकी पहचान चोरी कर ली गई है,उसके विरुद्ध अन्य कारवाई कर उसके लिए कई परेशानी खड़ी कर सकता है। साथ ही सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर किसी की भी छवि धूमिल कर सकता है,जो आजकल हम खबरों में पढ़ते-देखते आ रहे हैं।
पहचान की चोरी का शिकार बनने से खुद की रक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है,जितनी हम चोरी के डर से अपने घर-सामान व वाहन की,बस में या बाजार में अपने पर्स कट जाने के लिए करते हैं,क्योंकि अपराध की ये कार्यशैली इन सब अपराधों से कहीं ज्यादा खतरनाक है। हम किसी भी वर्ग,उम्र या समुदाय के क्यों न हों,पर किसी भी अपराध को रोकने के लिए सावधानी व सतर्कता की हर समय बहुत आवयश्कता है।  पहचान चोरी से बचने के लिए  अपने दस्तावेज़ों  को सावधानी से प्रयोग में लाना होगा। याद रहे हम उसे कहीं भी न छोड़ दें, किसी भी अन्य व्यक्ति को देने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल कर लें,व कार्य न होने पर वापस मांग लें। बैंक स्टेटमेंट, क्रेडिट कार्ड-डेबिट कार्ड की प्राप्तियों को सावधानी पूर्वक रखें या जरूरत न होने पर सावधानी से नष्ट करें। सोशल मीडिया पर खाता(प्रोफाइल) सोच-समझकर बनाएं व मित्रता,पहचान की पुष्टि होने के बाद ही स्वीकारें। बैंकिंग लेन-देन हो,ई-वॉलेट हो या सोशल मीडिया के खाते,हर खाते का गुप्त कोड या संकेत(पासवर्ड)मजबूत बनाकर रखें,जिसमें अक्षर,संख्या और विशेष वर्ण के यादृच्छिक संयोजन का उपयोग हो। एक बात जरूर ध्यान रखिए कि प्रत्येक खाते के लिए अलग-अलग गुप्त कोड बनाएँ और उन्हें हर ३ माह में बदल लें।
समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जाँच करें। आप तीन प्रमुख क्रेडिट रिपोर्टिंग ब्यूरो में से प्रत्येक से हर साल एक नि:शुल्क क्रेडिट रिपोर्ट लेने के लिए हकदार हैं। एक रिपोर्ट में हर चार महीने का अनुरोध करें,और संदिग्ध या गलत जानकारी के लिए इसकी समीक्षा कर तुरंत उचित कार्यवाही करें। अपने आधार और पैन नम्बर कार्ड की जानकारी बिल्कुल साझा नहीं करें,साथ ही इन्हें अपने बटुए में भी रखने से बचें। आज़ के समय में सामाजिक मीडिया के बारे में ज्यादा सावधान-सतर्क रहने की जरूरत है। यहाँ अपने जन्म दिनांक या पते के रूप में व्यक्तिगत जानकारी भूलकर भी साझा न करें। साथ ही अपनी गोपनीयता जमावट (सेटिंग्स) को मजबूत रखें,अपने   फोन को वायरस निरोधी करें। एक गुप्त कोड के साथ अपना उपकरण बन्द रखें। जब आप इसे उपयोग नहीं कर रहे हों तो ब्लू टूथ बंद कर दें। वाई-फाई की सेवाएं सार्वजनिक स्थान पर उपयोग में न लें। एप या कोई एप्लीकेशन लेने में सावधान रहें। हमेशा लोकप्रिय एप को रेटिंग अनुसार ही चुनें,क्योंकि,इन्ही एप के जरिए मैलवेयर व अन्य वायरस का जाल बिछाया जाता है।
फ़िशिंग,विशिंग,इसमिशिंग के लक्षण में जैसे ईमेल,लिंक या अनचाही फोन कॉल और संदेश से सावधान रहें। अगर कोई आपकी व्यक्तिगत जानकारी इन माध्यम से मांग रहा है तो कतई साझा न करें। हमेशा अपने वित्तीय लेन-देन  की निगरानी करें। जैसे ही आप अपने बैंक,क्रेडिट कार्ड या किसी भी खाते में कोई संदिग्ध लेन-देन ध्यान में करें,तो तुरंत उसकी सूचना  करें। एक और बात बहुत महत्वपूर्ण है कि हमेशा अपने मेल आईडी को सुरक्षित रखें। आपकी मेल स्वाइप एक चोर के लिए सबसे आसान तरीका है,जो आपकी पहचान चोरी करने में बहुत कारगर साबित हो सकता है। इसलिए,असुरक्षित नेटवर्क से बचें,अपने ईमेल पर डिजिटल हस्ताक्षर रखें, स्वचलित एड्रेसिंग सुविधाओं को बंद रखें,निजी व महत्वपूर्ण ईमेल के लिए केवल निजी खातों का  उपयोग करें। सुनिश्चित करें कि आपकी ईमेल प्रमाणीकरण प्रक्रिया एन्क्रिप्ट की गई हो, कभी भी ईमेल ग्राहक को सावधानीपूर्वक विचार किए बिना एचटीएमएल या एक्स एचटीएमएल ई-मेल प्रस्तुत करने की अनुमति न दें। इन दिशा-निर्देशों का पालन करके हम  संवेदनशील जानकारी को निजी रख सकते हैं,लेकिन याद रखें कि अपनी व्यक्तिगत जानकारी की रक्षा के लिए हमें सदैव सक्रिय व जागरूक होना होगा, तभी हम इस तरह के अपराधों से बच सकते हैं।

परिचय : विशाल सक्सेना का जन्म स्थान शुजालपुर(मध्यप्रदेश) और जन्म तारीख २२ नवम्बर १९७७ है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के इंदौर में बसे हुए हैं। श्री सक्सेना की शिक्षा-व्यापार प्रबंधन में स्नातकोत्तर सहित सीएफई, पीजीडीएचआर,ग्रेफोलॉजिस्ट,साइबर क्राईम इंवेस्टीगेटर और विश्लेषक की है। 
आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी ( सहायक उपाध्यक्ष-बैंक)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप पीपल फ़ॉर एनिमल में स्थाई सदस्य होने के साथ ही एमनेस्टी इंटरनेशन इंडिया,अखिल भारतीय  एवं अन्य प्रादेशिक संस्थाओं में पदों पर कार्यरत हैं। लेखन विधा-आलेख है,और सामाजिक-आपराधिक विषय पर लिखते हैं। अखबारों और कुछ पुस्तकों में कई लेख छपे हैं। आपको कायस्थ गौरव,रक्त दान के लिए,ईगल आई व कई प्रदेशों के पुलिस विभाग और शिक्षण संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक चेतना व सतर्कता का प्रचार-प्रसार करना है। 
आपके लिए प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद,सरदार पटेल व मेनका गांधी है। आपकी विशेषज्ञता-बैंक संबंधी धोखाधड़ी पता करने और अपराध विवेचना में है। विशाल सक्सेना की रुचि सामाजिक कार्य,लेखन,गीत सुनना,नए विषयों को पढ़ना व साझा करना में है।

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