पहचान

प्रेरणा सेन्द्रे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
******************************************************

नन्हीं-सी प्यारी-सी नादान होती है,
बेटियां तो माँ की पहचान होती है।
न हो बेटी तो वीरान हो घर,
घरों में रौनक और उजाला लाती हर पहर।
मस्तक को गर्व से ऊँचा करती है,
बेटियां तो माँ की पहचान होती हैंll 
 
माँ की रुंद आहट का आभास कर लेती हैं,
उसके दर्द को समझ आधा कर देती हैं।
हो कोई विपत्ति वो साथ खड़ी रहती हैं,
बेटियां तो माँ की पहचान होती हैll 

न करो भ्रूण हत्या,मानस पछताओगे,
जानवर की तरह जिओगे,वंश न बढ़ा पाओगे।
कन्यादान करके पाप से मुक्त करती हैं,
बेटियां तो माँ की पहचान होती हैंll  
परिचय : प्रेरणा सेन्द्रे का निवास इन्दौर में ही है। एमएससी और बीएड(उ.प्र.) तक शिक्षित होकर आप वर्तमान में योग शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। आपने योग का कोर्स भी किया है। लेखन में आप शौकियाना हैं। श्रेष्ठ लेखन के लिए भोपाल में सम्मानित हो चुकी हैं। आपकी जन्म तिथि-१४ नवम्बर १९७१ हैl वर्तमान में इंदौर(म.प्र.) में ही रहती हैंl सामाजिक गतिविधि में आप थैलीसीमिया के लिए कार्यरत संस्था में संयुक्त सचिव पद पर सेवारत हैंl लेखन विधा में-कविता,कहानी,लघुकथा लिखती हैंl  आपको साहित्यिक संस्थाओं द्वारा शब्द शक्ति सम्मान आदि दिए गए हैं,तो विशेष उपलब्धि में जय महाकाल @ सिंहस्थ के लिए इंदौर में सम्मान,भोपाल में सम्मान और साझा संग्रह में रचना प्रकाशन के लिए सम्मान पाना हैl श्रीमती सेन्द्रे की लेखनी का उद्देश्य-अपने विचारों को लेखनी से जीवित रखना एवं दूसरों तक पहुँचाना हैl

Hits: 39

आपकी प्रतिक्रिया दें.