पानी की बोतल

वन्दना पुणताम्बेकर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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करुणा को काफ़ी सालों बाद बेटी हुई। वह मानसिक रूप से थोड़ी अस्वस्थ थी। वह हमेशा सोचती,ऊपर वाला देता तो ठीक देता। मोना के सभी काम देरी से शुरू हुए। वह बोलना भी देर से सीखीl परिस्थितियां कुछ ऐसी थी कि,महंगे विद्यालय में नहीं पढ़ा सकती थी। मोना अभी बारह साल की हो गई थी,मगर दूसरी कक्षा तक ही पहुँची थी। शाला के बाहर एक बुढ़िया जामुन,बेर आदि फल बेचती थी। एक दिन उस बुढ़िया ने मोना से पीनी को पानी मांगा। अब रोज का नियम हो गया था।मोना रोज दो बोतल लेकर जाती थी,करुणा को यह बात काफी दिनों के बाद पता चली। बोली..-“मोना तुम ये रोज दो बोतलें क्यों ले जाती हो,वैसे ही बेग भारी है। ऊपर से पानी का वजन।” “नही माँ रहने दो,एक बोतल में बूढ़ी अम्मा के लिये ले जाती हूँ।” “क्या..? कौन बूढ़ी अम्मा ?” करुणा ने पूछा। करुणा घबरा गई। “अरे आजकल बच्चों को उठाकर ले जाते हैं,सीधे शाला जाया कर। “अरे माँ,वह बूढ़ी अम्मा अपना सामान ही बड़ी मुश्किल से उठा पाती है,मुझे क्या उठाएगी।” औऱ हँसने लगी। अब उसे डॉक्टर की बात सच होती नजर आई। डॉक्टर ने कहा था कि,जैसे-जैसे बड़ी होगी ठीक हो जायेगी,मगर सामान्य बच्चों से थोड़ी कम रहेगी। करुणा से रहा नहीं गया। आज वह खुद उसे शाला छोड़ने गई। देखा तो एक कमजोर बुढ़िया सड़क किनारे फल बेच रही थी। उसने जैसे ही मोना को देखा,उसका चेहरा खिल उठा। मोना ने उसे बोतल दी। अपनी बेटी को इतना नेक काम करते देख करुणा गद-गद हो उठी। आज उसे अपनी बेटी कहीं से भी मानसिक तौर पर कमजोर नजर नहीं लगी। वह उसकी `पानी की बोतल` देख मुस्कुरा उठी…।

परिचय:वन्दना पुणतांबेकर का स्थाई निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। इनका जन्म स्थान ग्वालियर(म.प्र.)और जन्म तारीख ५ सितम्बर १९७० है। इंदौर जिला निवासी वंदना जी की शिक्षा-एम.ए.(समाज शास्त्र),फैशन डिजाईनिंग और आई म्यूज-सितार है। आप कार्यक्षेत्र में गृहिणी हैं। सामाजिक गतिविधियों के निमित्त आप सेवाभारती से जुड़ी हैं। लेखन विधा-कहानी,हायकु तथा कविता है। अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं,जिसमें बड़ी कहानियां सहित लघुकथाएं भी शामिल हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-रचनात्मक लेखन कार्य में रुचि एवं भावनात्मक कहानियों से महिला मन की व्यथा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है। प्रेरणा पुंज के रुप में मुंशी प्रेमचंद जी ओर महादेवी वर्मा हैं। इनकी अभिरुचि-गायन व लेखन में है।

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