पिता की तसल्ली

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
*******************************************************
सृमद्धि ने १२ वीं का इम्तेहान दिया और उसकी मेहनत से प्रथम श्रेणी भी पा लीl अब बिटिया सयानी हो चुकी है,लिहाजा आगे का सफर उसी को तय करना है। प्रशासनिक सेवा,बैंक,रक्षा और तकनीकी सब रास्ते खुले हैं। पिता भी चाहते हैं कि,हाथ पीले होने के पहले वह सक्षम बन जाए। बिटिया चकाचौंध(ग्लैमर) चाहती
है,पिता संस्कार का दामन थामे है। बिटिया संवरना चाहती है, पिता दुनिया की नजरों से बचाना चाहते हैं। बिटिया विभिन्न विधाओं में निपुणता चाहती है और पिता हाथ पीले करने की जिद,इसे पीढ़ी अंतराल कहें या पिता की चिंता। आखिरकार पिता ने बिटिया को यह कहते हुए अपने मन को स्थिरता प्रदान की,कि अब तुम सयानी हो गई हो अपना भला-बुरा समझने में सक्षम हो, लिहाजा तुम जो करोगी अच्छा करोगी।

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

Hits: 183

आपकी प्रतिक्रिया दें.