पितृ पक्ष पर स्मृति

डॉ.मीना कौशल 
गोण्डा(उत्तरप्रदेश)

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हे पितृपक्ष के पूज्यदेव,
छाए रहते प्रतिपल मन में।
आशीष आपका वासित है,
मेरे इस शुभमय जीवन में।
ओ माँ मेरी माँ याद आपकी,
कर देती अन्तस् तार-तार।
स्वप्नों में चाहूँ पकड़ सकूँ,
पर मैं जाती हर बार हार।
हे तात हमें उपदेश सदा,
खुश रहने का देते रहते।
जब व्यथित कभी होता ये मन,
मुस्कान भरे पीड़ा हरते।
घर के वटवृक्ष बने रहते,
शीतल छाया प्रतिपल देते।
अब भी आकर दुःख-पीड़ा को,
अपने सन्तति की हर लेते॥
हे तात श्वसुर कितने निश्छल,
मेरी उन्नति पर खुश होते।
श्रद्धा अर्पित मैं आज करूँ,
अब स्मृति में रोते-रोते।
माँ आप रही वट की छाया,
निश्चिन्त रहा करता था मन।
हो सदा बसी अन्तस्थल में,
मैं करूँ सजलमय चक्षु नमन।
मेरी श्रद्धा स्वीकार करो,
विह्वल मन मेरा शान्त करो।
है अजर-अमर ये आत्म सदा,
भ्रान्तित मन की सब भ्रान्ति हरो॥
परिचय-डॉ.मीना कौशल की जन्मतिथि २० जून १९८० और जन्म स्थान-उमरी बेगमगंज,गोण्डा(उ.प्र.) है। लेखन इनका शौक है। डॉ.कौशल का वर्तमान-स्थाई निवास गोण्डा स्थित गायत्रीपुरम् सिविल लाइन्स हैl बी.एड. और पी.एच-डी. तक शिक्षित मीना जी पेशे से शिक्षण के कार्यक्षेत्र में हैंl आपकी लेखन विधा-मुक्तक,दोहा,चौपाई,गीतिका इत्यादि हैl रचनाओं का प्रकाशन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में जारी हैl आपको प्राप्त सम्मान में काव्यधारा रत्न,काव्यप्रज्ञ,दोहा माणिक्य,साहित्य सुधाकर,सर्वश्रेष्ठ मुक्तक तथा वीणापाणि सवैया श्रेष्ठ आदि हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-रचनाधर्मिता बनाए रखना हैl

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