पीर बरस पड़ी

डॉ.नीलम कौर
उदयपुर (राजस्थान)
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पीर धरा की प्रिय गगन के सीने में घनीभूत थी,
रात भर करवट-करवट
लहर-सी मनाकाश के
किनारों से टकराती रही
सब्र का बांध टूट गया,
भोर होते-होते सैलाब
बनकर बरस पड़ा।
देख कर विरहिनी के हृदय की उदासियों का गहन मंजर,
सावन का मन भी द्रविभूत हुआ
पिघल गया सावन औ’ झूमकर,
बरस गया।
धरतीपुत्र ने उत्साहित हो
नेह के बीज रोपे थे,
भूख से बेहाल न हो मेरे
प्रभु के बंदे,
फसल नाज की बोई थी
देखकर उसकी समर्पित
आत्मोत्सर्ग देवेंद्र भी
पिघल गए,
सींचने धरा और अंकुरित
फसल के लिए
द्वार जल के खोल दिए।
त्रिलोक के पावन दिवस पर
जगनियंता शिव की रात्री,
स्वयं इंद्र ने जलाभिषेक
का आयोजन किया
जहाँ मनुपुत्र न पहुँच सके,
उस निर्जन में भी
जाकर अभिषेक करने लगे॥
परिचय – डॉ.नीलम कौर राजस्थान राज्य के उदयपुर में रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। आपका उपनाम ‘नील’ है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। आपका निवास स्थल अजमेर स्थित जौंस गंज है।  सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। अन्य सामाजिक संस्थाओं में भी जुड़ाव व सदस्यता है। आपकी विधा-अतुकांत कविता,अकविता,आशुकाव्य और उन्मुक्त आदि है। आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना और भावनाओं के ज्वार को शब्दों में प्रवाह करना ही लिखने क उद्देश्य है।

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