प्यासी धरा

निशा गुप्ता 
देहरादून (उत्तराखंड)

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रात से बरस रहे हैं मेघा,
दामिनी चम-चम चमक रही
प्यासी धरती फिर भी तरसे,
पड़ते पानी भी सूख रही।
अब तो ध्यान करो कुछ इसका,
कुछ तो दोहन तुम बन्द करो
सूखे सारे ताल-तलैया,
सबमर्सिबल अब सब बन्द करो।
नहीं रहेगा जग में पानी,
बून्द-बून्द को तरसेंगे
उससे पहले ही मिलकर,
इसका संवर्धन शुरू करो।
मत खींचो सीने से माँ के,
दे-देकर हलकान हुई
अब तो कोई करो उपाय,
इसका तन-मन तृप्त करो।
कुछ अब पेड़ लगाओ चलकर,
धरती का श्रृंगार करो
हरी-भरी मुस्काती है जब,
मेघ मिलन को आते तब॥
परिचय-निशा गुप्ता की जन्मतिथि १३ जुलाई १९६२ तथा जन्म स्थान मुज़फ्फरनगर है। आपका निवास देहरादून में विष्णु रोड पर है। उत्तराखंड राज्य की निशा जी ने अकार्बनिक रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर किया है। कार्यक्षेत्र में गृह स्वामिनी होकर भी आप सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत श्रवण बाधित संस्था की प्रांतीय महिला प्रमुख हैं,तो महिला सभा सहित अन्य संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। आप विषय विशेषज्ञ के तौर पर शालाओं में नशा मुक्ति पर भी कार्य करती हैं। लेखन विधा में कविता लिखती हैं पर मानना है कि,जो मनोभाव मेरे मन में आए,वही उकेरे जाने चाहिए। निशा जी की कविताएं, लेख,और कहानी(सामयिक विषयों पर स्थानीय सहित प्रदेश के अखबारों में भी छपी हैं। प्राप्त सम्मान की बात करें तो श्रेष्ठ कवियित्री सम्मान,विश्व हिंदी रचनाकार मंच, आदि हैं। कवि सम्मेलनों में राष्ट्रीय कवियों के साथ कविता पाठ भी कर चुकी हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य- मनोभावों को सूत्र में पिरोकर सबको जागरुक करना, हिंदी के उत्कृष्ट महानुभावों से कुछ सीखना और भाषा को प्रचारित करना है।

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