प्रकृति

हर्षदा सैनसांकली
मुंबई(महाराष्ट्र)
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चलो चलिए,
हाइकू बनाते हैं 
प्रकृति परl 
 
 
हम सर्वत्र,
एकत्र चलते हैं
फिर भी चुपl 
 
 
पानी से सीखा,
एकाग्रता का मूल्य  
समझे कौन ?
 
 
तूफान में है,  
नैया जो हमारी
संभले कौन ?
 
 
है आँखें मूंदी, 
ना जाने किसे ढूँढें 
हे भगवान!
 
 
कोशिश की है, 
बदलाव लाने की 
लाया  ना गयाl 
 
 
जान प्यारी, 
है आज के लोगों को 
देश का क्या ?

परिचय- हर्षदा सैनसांकली नवी मुंबई स्थित निजी शाला में अध्ययनरत हैl इनकी जन्म तारीख ९ नवम्बर २००३ तथा जन्म स्थान सोलापूर हैl निवास नवीं मुम्बई स्थित कोपरखैराने (नवी मुंबई)में ही हैl हर्षदा की उपलब्धि में-हिंदी कहानी लेखन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार एवं हिंदी भाषण प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर आना है। इन्हें कविता लिखना बहुत पसंद है, और यही मुख्य रुचि है। लेखन विधा हिंदी-अंग्रेजी में कविता,कहानी और निबंध हैl

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