प्रभु तुमको आना पड़ेगा

प्रियांशु तिवारी ‘वात्सल्य’
लखनऊ( उत्तरप्रदेश)

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प्रभु तुमको आना पड़ेगा,
छल क्षोभ उठा मन लोभ उठाl
कर जोर विनीत करे तुमसे,
धर रूप धरो या अनूप धरो
चक्र सुदर्शन उठाना पड़ेगाl
हे प्रभु तुमको आना पड़ेगाll

मन शूल उठा जग भूल उठा,
नर आस करे नृप नास करे
नृप रावण रूप कुरूप करो,
जग को याद दिलाना पड़ेगाl
हे पभु तुमको आना पड़ेगाll

कल कोल उठा जग लोल उठा,
अब ताप हरो संताप हरो
सब नाप उठे जग काँप उठे,
धर कल्कि रूप दिखाना पड़ेगाl
हे प्रभु तुमको आना पड़ेगाll

परिचय-प्रियांशु तिवारी का साहित्यिक उपनाम `वात्सल्य` हैl १२ जुलाई २००० को सुल्तानपुर(उत्तर प्रदेश)में जन्म हुआ हैl वर्तमान में लखनऊ( उत्तरप्रदेश) में,जबकि स्थाई पता सुल्तानपुर ही हैl इनकी शिक्षा- इंटरमीडिएट और कार्यक्षेत्र-लखनऊ हैl लेखन विधा-काव्य(गीत,ग़ज़ल,मुक्तक) हैl वात्सल्य को हिंदी-इंग्लिश भाषा का ज्ञान हैl इनकी रचनाओं का प्रकाशन पत्र-पत्रिकाओं में हुआ हैl प्राप्त सम्मान में २०१८ में नवांकुर सम्मान,हिंदी सेवा सम्मान,सुल्तानपुर से सम्मान सहित सरदार पटेल की जयंती पर २०१७ में केन्द्रीय मंत्री से भी सम्मान पाया हैl यह ब्लॉग पर भी पानी भावनाएं व्यक्त करते हैंl इनकी विशेष उपलब्धि-केन्द्रीय मंत्री द्वारा सम्मानित किया जाना हैl लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा को विश्व की भाषा बनाना हैl इनके लिए प्रेरणा पुंज- साहित्य भूषण डॉ.रंगनाथ मिश्र हैl विशेषज्ञता-वाचन शैली है तो रुचि-लिखना और पढ़ना हैl

 

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