प्रश्न-सांड पर व्यंग्य लिखो

सुनील जैन `राही`
पालम गांव(नई दिल्ली)

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शहर से आठ किलोमीटर दूर गांव,निखालिस गांव। शहर की कोई मिलावट नहीं,दूध की कोई गारंटी नहीं। छोटा-सा विद्यालय। मास्टर साइकिल से पढ़ाने के लिए गांव आता है। मार्च यानी परीक्षा माह। परीक्षा हो या न हो,मास्टर अपने समय से ही आएगा। उसे परीक्षा थोड़े ही देना है,जो समय से आए। परीक्षा में क्या-क्या पूछा जाएगा,पिछले महीने बच्चों को बता दिया था। ये कोई शहर तो है नहीं,`गैस पेपर` मिल जाएं या फिर पेपर लीक होने जैसी सुविधा हो। जो कुछ है एकल खिड़की-मास्टर है। परचा भी वही देगा,उत्तर भी वही बताएगा,गैस भी वही करेगा। खैर, मार्च के बाद मास्टर और बच्चे दोनों ही किताबों से ऐसे बाहर निकल पड़ते हैं-जैसे कीचड़ से कमल।
परीक्षा की खुशी में कुछ बच्चे अपने बाप की शर्ट पहनकर आ जाते। गांव में अमीरी का आलम यह है कि एक घर में एक शर्ट ही होती है। बाप पहन ले,या बेटा। दिक्कत बड़ों की थी। छोटे तो बाप की शर्ट पहनने के बाद चडडी पहना पसंद नहीं करते थे। जीन्स की तरह चडडी फटी नहीं होती थी। चडडी और चडढा शहरों में पाए जाते हैं। गांव में तो घुटन्ना पहना जाता है। उस घुटन्ने में टखना तक नहीं दिखता,जिसे आप शहरों में `बरमूड़ा` कहते हैं।
खैर,कक्षा जम गई,मास्टर जी नहीं आए। ये भी भरोसा नहीं कि आएंगे ? एमसीडी की एकल खिड़की है। खुली तो खुली,नहीं खुली तो नहीं खुली। जिसका कोई खसम न हो,उसे भला किसकी हिम्मत,कुछ कह दे। वैसे भी सांड को कौन रोक पाया है।
विद्यालय के एक मात्र सुसभ्य (जो शर्ट पहनकर आए वही सुसभ्य) विद्यार्थी ने बताया-मास्टर जी आ गए। उनको विद्यालय के बाहर सांड ने साइकिल सहित दे मारा। पूरी कक्षा जोर से हंस पड़ी,क्योंकि जब भी मास्टर जी कहीं से पिटकर आते तो पूरी कक्षा को सांड की तरह पीटते हैं। मास्टर जी के कुर्सी पर बैठते ही एक लड़का पड़ोस से एक गिलास पानी लाने भागा। दूसरे ने कोने में पड़ी संटी मास्टर जी को थमा दी। जो उन्हें संटी पकड़ाता,उसे वह नहीं पीटते थे। पानी पीकर मास्टर जी ने कोसा- `सांड पर व्यंग्य लिखो।`
बच्चे रुपए की तरह टपक गए। कुछ केरल में आई बाढ़ में बह गए। कुछ उत्तर प्रदेश की पार्टी की तरह बंट गए। एक ने बड़े साहस से पूछा-मास्टर जी गाय पर निबंध याद है,वही लिख लें। मास्टर जी ने उस पास बुलाकर उसे दो संटी से गरम किया। फिर बोले-`जब मैंने कहा,सांड पर व्यंग्य लिखो-तो लिखो।` बाकी बच्चों की हिम्मत जवाब दे गई। सरपंच के लोंडे की हेकड़ी अभी बाकी थी,बोला-सांड तो बहुत खतरनाक प्राणी है। मास्टर जी ने उसे भी पास बुलाया और कहा-`सरपंच की औलाद,पंच में जब सर लग जाए तो भाव डॉलर की तरह बढ़ जाते हैं।` उसे पांच संटी से नवाजा गया। अब तक सभी बच्चे राशन दुकान के भाव की तरह कंट्रोल में आ गए थे।
मास्टर ने बाहर देखा,सांड जा चुका था और मास्टर बीड़ी पीने निकल गया। शिक्षा अधिकारी के आने पर ही सिगरेट का सेवन होता था। बीड़ी ज्वार की रोटी है,सिगरेट गेंहू की,जो कभी-कभी तीज त्योहार पर पी जाती है। मास्टर जी को आज सांड ने पटका था,इसीलिए सांड पर व्यंग्य लिखने को कहा-अगर बीबी ने पटका होता तो बीबी पर एसरटिव वाक्यों में निबंध लिखने के लिए कहते। मास्टर जी जब भी बीड़ी पीने जाते,तो बाबजी के टप्पर वाली होटल में पेशल कट और इन्दौरी मिक्चर जरूर खाते हैं। इस प्रक्रिया में एक घंटा लग जाता। उस दौरान कक्षा रामभरोसे। रामभरोसे कक्षा का मानीटर है। मानीटर ने कहा-भाई ऐसा करो अपने गांव के सांड के बारे में लिख देते हैं। ये व्यंग्य क्या होता है,ये तो अमरीका को भी पता नहीं। उसने अमरीका का नाम रेडियो चैपाल पर सुना था।
उसने बोलना शुरू किया। सांड एक सामाजिक प्राणी है। वह प्रिंसिपल साहब की तरह दिखने में सीधा और बनिए की तरह घाघ होता है। जेल वाले साधू की तरह मौन रहता है। सरपंच की तरह डकैत। पुलिस की तरह हफ्ता वसूलता है। उसका चरित्र नेता के समान होता है। वह अनैतिकता में पूरा विश्वास करता है। उसके दो सींग होते हैं,जो कार्यपालिका और न्यायपालिका की तरह होते हैं,जिससे वह निरीह बैलों को मारता है। जमींदारों की तरह कहीं भी कब्जा करता है। उसके पूंछ होती है। पूंछ से मक्खी उड़ाने का काम करता है। उसका मानना है,मक्खी गांव की सखी है,जो सबका चरित्र खराब करने में लगी है। मक्खी को गांव से बाहर खदेड़ देना चाहिए,लेकिन राजनीति के सांड नहीं चाहते। जब भी वह दारू की दुकान के पास से गुजरता है,उस पर मक्खियां बैठ जाती हैं। सांड एक धार्मिक प्राणी है। वह हर साल पूजा जाता है, जैसे हर साल आयकर दिया जाता है। सांड धर्मनिरपेक्ष भी है। वह राम और रहीम दोनों को सींग पर उछाल देता है। सांड प्रजातंत्र में पूरा विश्वास रखता है। वह कभी भी गांव में दूसरे सांड का चुनाव नहीं होने देता। अगर कोई बाहरी सांड आ जाए,तो उससे मल्लयुद्ध करता है,अगर कोई बछड़ा सांड बनने का इच्छुक हो तो उसकी दावेदारी का टिकट कटवा देता है। सांड ठेकेदारी प्रथा का पूजक है। खुद कुछ काम नहीं करता,बैलों से काम करवाता रहता है।
अब लिखो-सांड के प्रकार-सांड कई प्रकार के पाए जाते हैं। धार्मिक सांड,जाति का सांड,समाज का सांड,राजनीति का सांड, गांव का सांड,कस्बे का सांड,शहर का सांड,प्रदेश का सांड,देश का सांड,विश्व का सांड। यह तथ्य और आंकड़े सांड अनुशीलन से प्राप्त हुए हैं। आदि-आदि इत्यादि-इत्यादि।
सांड एक प्रवृत्ति है। देश में गाय की राजनीति चलती है और गांव में सांड की। गाय गरीबी का प्रतीक है तो सांड जमींदारी का।
मास्टर चाय पीकर कक्षा में नहीं आया। सांड की वजह से एकल खिड़की बंद थी।

परिचय-आपका जन्म स्थान पाढ़म(जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद)तथा जन्म तारीख २९ सितम्बर है।सुनील जैन का उपनाम `राही` है,और हिन्दी सहित मराठी,गुजराती(कार्यसाधक ज्ञान)भाषा भी जानते हैं।बी.कॉम.की शिक्षा खरगोन(मध्यप्रदेश)से तथा एम.ए.(हिन्दी,मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया है। पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन खाते में-व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी है।आपकी कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में लेखनी का प्रकाशन होने के साथ आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। राही ने बाबा साहेब आम्बेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया है। मराठी के दो धारावाहिकों सहित करीब १२ आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं,रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ४५ से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वविद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैं। कुछ अखबारों में नियमित व्यंग्य लेखन करते हैं। एक व्यंग्य संग्रह अभी प्रकाशनाधीन हैl नई दिल्ली प्रदेश के निवासी श्री जैन सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रीय है| व्यंग्य प्रमुख है,जबकि बाल कहानियां और कविताएं भी लिखते हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-पीड़ा देखना,महसूस करना और व्यक्त कर देना है।

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