प्राकृतिक आपदाएं

तोषण कुमार चुरेन्द्र
लोहारा(छत्तीसगढ़)
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आंधी प्रकृति,
अरियों का दमन
मिटे विकृति।

क्रोधित वात,
लाई रेतीली आंधी
बन सवालात।

आया तूफान,
सहमें थलचर
मन हैरान।

बाढ़ ग्रसित,
था उत्तराखंड
मन द्रवित।

आता भूकंप,
धरणी विचलित
लो हड़कम्प।

वारि अकाल,
घनघोर बारिश
हे! महाकाल।

उठी लहर,
बनकर सुनामी
ढाया कहर।

सदियों बाद,
केदार भूस्खलन
फिर आबाद।

घोर वलय,
भड़के ज्वालामुखी
महाप्रलय।

न हो प्रलय,
रक्ष पर्यावरण
करें प्रणय।

परिचय-तोषण कुमार चुरेन्द्र की जन्मतिथि २८ जून १९८४ एवं जन्म स्थान धनगाँव,डौंडी लोहारा हैl वर्तमान में आप लोहारा जिला-बालोद (छ.ग.)में ही बसे हुए हैंl स्थाई पता भी यही हैl संपदा वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश के तोषण कुमार चुरेन्द्रग्राम ने स्नातक सहित डी.एड. किया हुआ हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक (निजी शाला, लोहारा)हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत लोहारा में ही समाज से सक्रियता से जुड़े हुए हैंl आपकी लेखन विधा-गीत, ग़ज़ल, दोहा, मुक्तक,  कुंडली तथा हाइकु हैl आप हिन्दी के अलावा छत्तीसगढ़ी में भी लेखन करते हैंl `हाइकु की सुगंध` में आठ हाइकु का प्रकाशन हो चुका हैl ब्लॉग पर भी लिखते हैंl लेखनी का उद्देश्य-लेख के माध्यम से जन जागरण करना हैl

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