फख्र करना लाजिमी है

प्रदीपमणि तिवारी `ध्रुव भोपाली`
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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फख्र करना लाजिमी है नामवर जब हो गये।
दिल मे बस जाना है वाजिब बाअसर जब हो गये।

चाहकर भी दिल लगाना ये तो मुमकिन है नहीं,
उनकी चर्चा भी न जायज वो ज़हर जब हो गये।

आसमाँ मानिन्द उठते जा रहे तो क्या हुआ,
गाँव भूले और गलियां वो शहर जब हो गये।

बन गये मौसम हैं वो उन वादियों मानिन्द अब,
खुशनुमाई क्यों सुनामी की लहर जब हो गये।

बेमुरब्बत है जमाना यारी के कुछ मायने,
`ध्रुव` मुनासिब होना रुखसत वो कहर जब हो गयेl

वो परिन्दे आदमी से ज्यादा हैं `ध्रुव` बावफा,
हो गये रुखसत दिलों से बेअसर जब हो गयेll

परिचय-प्रदीपमणि तिवारी का लेखन में उपनाम `ध्रुव भोपाली` हैl आपका कर्मस्थल और निवास भोपाल (मध्यप्रदेश)हैl आजीविका के लिए आप भोपाल स्थित मंत्रालय में सहायक के रुप में कार्यरत हैंl लेखन में सब रस के कवि-शायर-लेखक होकर हास्य व व्यंग्य पर कलम अधिक चलाते हैंl इनकी ४ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैंl गत वर्षों में आपने अनेक अंतर्राज्यीय साहित्यिक यात्राएँ की हैं। म.प्र.व अन्य राज्य की संस्थाओं द्वारा आपको अनेक मानद सम्मान दिए जा चुके हैं। बाल साहित्यकार एवं साहित्य के क्षेत्र में चर्चित तथा आकाशवाणी व दूरदर्शन केन्द्र भोपाल से अनुबंधित कलाकार श्री तिवारी गत १२ वर्ष से एक साहित्यिक संस्था का संचालन कर रहे हैं। आप पत्र-पत्रिका के संपादन में रत होकर प्रखर मंच संचालक भी हैं।

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