फन्ने खां…साधारण फ़िल्म

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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दोस्तों,जब कोई शख्स अपने ख्वाब पूरे नहीं कर पाता तो वह यही ख्वाब अपने बच्चों के साथ सजाने लगता हैl `दंगल`,`अपने`, `बॉक्सर` सहित और भी कई फिल्में इसका उदाहरण रही हैंl `फन्ने खां` एक आम आदमी प्रशांत शर्मा(अनिल कपूर) की कहानी है,जो एक कामयाब गायक बनना चाहता है,लेकिन परिवार की खातिर फैक्टरी में काम करता हैl काम बंद हो जाता है,तो टैक्सी चलाने लगता है परिवार के लिएl तब उसका सपना कहीं धूमिल होकर खोने लगता है या परिवारिक जद्दोजहद में गुम होने लगता हैl
परिवार में पत्नी (दिव्या दत्ता) बेटी लता (पीहू) हैl  
 
प्रशांत गायकों से इस कदर प्रभावित है कि,उसने अपनी बेटी का नाम भी लता जी पर ही रखा था,क्योंकि प्रशांत अपनी बेटी को लता जी जैसी गायिका बनाना चाहता है,लेकिन पीहू का मोटापा उसके मज़ाक की वजह बनता हैl हर कोई उसका मजाक उड़ाता हैl प्रशांत उर्फ फन्ने खां की टैक्सी में एक परेशान पॉप सिंगर बेबीसिंह अपने पीए से परेशान होकर बैठ जाती हैl तब प्रशांत अपने दोस्त अधीर(राजकुमार) की मदद से गायिका बेबीसिंह का अपहरण कर लेते हैं,और फिर शुरू होता है घोल-मोलl
फ़िल्म के अंत में कुछ भी नया नहीं हैl सामान्य फिल्मों का अंत भी सामान्य होता है और वही हुआ भी हैl
कलाकारों की बात करें तो अनिल शानदार काम करते हैं,राजकुमार भी सधे अभिनेता हैंl साथ ही दिव्या दत्ता भी शानदार काम कर गई हैl 
फ़िल्म की कहानी दलाल भाईयों ने लिखी है,जिसका पहला भाग बढ़िया,लेकिन दूसरा औसत लगता हैl इरशाद कामिल के गाने अच्छे हैं,जिन्हें अमित त्रिवेदी ने स्वरबद्ध किया हैl एक गाना `अच्छे दिन कब आएंगें` चर्चा का विषय बना हुआ है,जो  अच्छा बना हैl अतुल मांजरेकर ने राकेश ओम प्रकाश के सहायक के तौर पर लम्बे समय तक काम किया हैl इस बार राकेश ने उन्हें मौका दिया,लेकिन वह इस मौके को कितना भुना पाए,यह तो ३ दिन की टिकट खिड़की ही  बताएगीl वैसे फिल्म की पटकथा कमज़ोर हैl इसकी कहानी डच फ़िल्म `एवरीबडीज़ फेमस` की रीमेक हैl फ़िल्म की एक लाइन स्टोरी तो शानदार है,लेकिन बड़ी होने पर फ़िल्म अपनी छाप छोड़ती चली गई और रस्सी हाथ से छूट गई हैl
एस.धीरू ने कैमरा चलाते हुए  कई दृश्य अच्छे से उकेरे हैंl स्थान भी  ज्यादातर असली ही लिए गए हैंl इस फ़िल्म को ढाई सितारा देना सही हैl
 परिचय इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

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