फाग

सौदामिनी खरे दामिनी
रायसेन(मध्यप्रदेश)

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होली के रंग सुहाने लगे,
जबसे श्याम ख़्वाबों में आने लगे।
रंग रंगीली होली आई,
प्यारे श्याम की पाती आई।
रंग अबीर की होली आई,
बरसाने में रंग गुलाल उड़े।
जबसे श्याम ख्वाबों मे आने लगे,
होली के रंग सुहाने लगे…॥

ललिता ने मारी भर पिचकारी,
राधा की भीगी गुलाबी सारी।
भीग गयीं है सखियाँ सारी,
दोनों हाथों से अबीरा उड़ाने लगे।
जबसे श्याम ख्वाबो मे आने लगे,
होली के रंग सुहाने लगे…॥

भावों के रंग है प्रेम अबीरे,
प्रेम रंग में रंगे है सभी रे।
प्रेम की महिमा सुनाने लगे,
जबसे श्याम ख्वाबों में आने लगे।
होली के रंग सुहाने लगे…॥

परिचय-सौदामिनी खरे का साहित्यिक उपनाम-दामिनी हैl जन्म-२५ अगस्त १९६३ में रायसेन में हुआ हैl वर्तमान में जिला रायसेन(मप्र)में निवासरत सौदामिनी खरे ने स्नातक और डी.एड. की शिक्षा हासिल की हैl व्यवसाय-कार्यक्षेत्र में शासकीय शिक्षक(सहायक अध्यापक) हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,दोहा, ग़ज़ल,सवैया और कहानी है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय दामिनी की लेखनी का उद्देश्य-लेखन कार्य में नाम कमाना है।इनके लिए प्रेरणापुन्ज-श्री प्रभुदयाल खरे(गज्जे भैया,कवि और मामाजी)हैंl भाषा ज्ञान-हिन्दी का है,तो रुचि-संगीत में है।

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