फिर से हुई दोस्ती

पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’
मुंबई(महाराष्ट्र)
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     निधि अपनी नानी के घर गर्मी की छुट्टियाँ बिताने आई थी। नानी के घर में मामा-मामी,मौसी,नानीजी और ममेरी बहन रितु थी। निधि को रितु के साथ खेलना,समय बिताना बहुत अच्छा लगता था। दोनों घंटों तक बातें करती और साथ में समय बिताती।
    नानी के घर पर उसे सभी प्यार करते,उसी के साथ खाना खाते,लूडो खेलते,घूमने जाते,बाजार ले जाते तथा नाना-नानी उसे अच्छी-अच्छी कहानियांँ भी सुनाते। घर के सभी लोग रितु से ज्यादा निधि पर ध्यान देने लगे थे।
      रितु को निधि का आना एक-दो दिन के लिए ही अच्छा लगा,मगर धीरे-धीरे उसे निधि से घृणा होने लगी। रितु को लगने लगा कि निधि ने उसका सारा प्यार छीन लिया है। वह अपने मन में विभिन्न तरह के विचार लाती और सोचती कि क्या किया जाए,जिससे मम्मी-पापा, दादा-दादी,बुआ फिर से मुझसे प्यार करने लग जाए।
      रितु ने निधि के खिलाफ एक योजना बनाई और घर के सभी सदस्यों और आसपास के मित्रों से निधि की बुराई करनी शुरू कर दी। ऐसी-ऐसी मनघड़ंत अफवाहें फैलानी शुरू कर दी,जिनका कोई वजूद ही नहीं था, लेकिन जब सबको इस सच्चाई का बोध हुआ तो सबने निधि से माफी मांगी और रितु की इस हरकत पर सबने उसके प्रति निंदा व्यक्त की। निधि के मामा-मामी और मौसी ने रितु को डांटा और उसे बोलना बंद कर दिया। इतना ही नहीं,बल्कि आसपास के मित्रों ने भी वैसा ही किया। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने
सबसे माफी मांगी,मगर अभी भी सब नाराज थे।
    रितु रोते-रोते अपनी दादी के पास गई। दादी ने पूछा,-“क्या हुआ रितु ? क्यों रो रही हो ?”
    उसने सब कुछ बता दिया दादी को। दादी मुझे अपनी गलती का पछतावा हो गया है,मगर सब अभी तक नाराज हैं। दादी ने रितु से कहा,-“तुम वैसा ही करो,जैसा मैं तुमसे कहूँ रितु।”
“ठीक है,मैं वैसा ही करूंगी जैसा आप कहेंगी।”
दादी ने रितु से कहा,-“तुम थोड़े से फूल लो और उन फूलों को अपने घर से चौराहे तक एक-एक करके सड़क पर रखती जाना।” रितु को कुछ अटपटा लगा,मगर उसने दादी से वादा किया था इसलिए उसने वैसा ही किया।
दादी ने रितु से कहा,-“अब तुम उन फूलों को सड़क से उठाकर ले आओ।” रितु वहां जाती है तो उसे हैरानी होती है। वह सोचती है कि कल उसने रास्ते पर बहुत से फूल रखे थे,मगर आज उसे सिर्फ चार-पांच फूल ही मिले हैं। रितु दौड़ी-दौड़ी दादी के पास जाती है और कहती है कि मैंने कल रास्ते पर काफी फूलों को कतार में रखा था,मगर आज मुझे तो सिर्फ पांच फूल ही मिले,ऐसा क्यों दादी ?
   दादी रितु से कहती है,-“हमारी जिंदगी भी इन फूलों की तरह है। तुमने निधि के लिए काफी अफवाह फैलाई थी।  अफवाह फैलाना आसान होता है,या किसी को बदनाम करना भी आसान है लेकिन कमान से तीर और मुँह से निकली बात वापस नहीं आती। इन बातों से हमारे हाथ कुछ नहीं आता,बल्कि शर्मिंदगी और हँसी का पात्र बनना पड़ता है।”
    अब रितु को अपनी गलती का वास्तविक एहसास हो गया था,इसलिए वह निधि से घर के सभी सदस्यों के समक्ष माफी मांगती है और फिर से ऐसी गलती न करने का वादा  करती है।
रितु और निधि में एक बार फिर से दोस्ती हो जाती है।
परिचय–पूजा हेमकुमार अलापुरिया का साहित्यिक उपनाम ‘हेमाक्ष’ हैl जन्म तिथि १२ अगस्त १९८० तथा जन्म स्थान दिल्ली हैl श्रीमती अलापुरिया का निवास नवी मुंबई के ऐरोली में हैl महाराष्ट्र राज्य के शहर मुंबई की वासी ‘हेमाक्ष’ ने हिंदी में स्नातकोत्तर सहित बी.एड.,एम.फिल (हिंदी) की शिक्षा प्राप्त की है,और पी.एच-डी. की शोधार्थी हैंI आपका कार्यक्षेत्र मुंबई स्थित निजी महाविद्यालय हैl रचना प्रकाशन के तहत आपके द्वारा आदिवासियों का आन्दोलन,किन्नर और संघर्षमयी जीवन….! तथा मानव जीवन पर गहराता ‘जल संकट’ आदि विषय पर लिखे गए लेख कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैंl हिंदी मासिक पत्रिका के स्तम्भ की परिचर्चा में भी आप विशेषज्ञ के रूप में सहभागिता कर चुकी हैंl आपकी प्रमुख कविताएं-`आज कुछ अजीब महसूस…!`,`दोस्ती की कोई सूरत नहीं होती…!`और `उड़ जाएगी चिड़िया`आदि को विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्थान मिला हैl यदि सम्म्मान देखें तो आपको निबन्ध प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार तथा महाराष्ट्र रामलीला उत्सव समिति द्वारा `श्रेष्ठ शिक्षिका` के लिए १६वा गोस्वामी संत तुलसीदासकृत रामचरित मानस पुरस्कार दिया गया हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा में लेखन कार्य करके अपने मनोभावों,विचारों एवं बदलते परिवेश का चित्र पाठकों के सामने प्रस्तुत करना हैl

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