फुटबॉल का करिश्माई जादू

प्रो.पुष्पिता अवस्थी

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फुटबॉल विश्व का एक ऐसा रोमांचक और करिश्माई खेल है,जहां निर्धारित समय के अंतिम क्षण तक में खेल का पासा पलटने की संपूर्ण संभावनाएं बनी रहती हैंl गोल बनाने की जीत में यदि हर्ष का शिखर है तो हारने पर विषाद का चरम भी लक्षितहैl  अच्छे कुशल खिलाड़ियों के कारण यदि टीम जीतती है तो दक्ष और निपुण टीम के कारण ही चैम्पियन बनना संभव हो पाताहैl रूस में खेले जा रहे में  चकी श्रृंखला में ब्राजील में हुए विश्वकप में जर्मनी की विजेता टीम को कोरिया की फुटबॉल टीम के खिलाड़ी द्वारा एक गोल दाग दिए जाने से जर्मनी को ऐसी मुंह की खानी पड़ी कि उसे इस विश्वकप श्रृंखला से ही बाहर हो जाना पड़ाl यद्यपि कोरिया की टीम पहले ही अपना दांव हार चुकी थी,और उसे घर लौटना था फिर भी जाते-जाते उसने जर्मनी के जीत के सपनों को चकनाचूर कर दियाl

रूस में खेले जा रहे हैं विश्वकप फुटबॉल मैच की श्रृंखला में सारे भेद तिरोहित हो गए हैं,वहीं देश श्रेष्ठ है जो फुटबॉल खेल में अव्वल हैl देश की पहचान का आधार फुटबॉल हैl ४ वर्षों के अंतराल में होने वाले इस खेल की तैयारी में ४ वर्ष लग जाते हैंl हर देश,देश का हर क्लब, क्लब का हर खिलाड़ी,प्रबंधक-निदेशक तक क्वालिफाइंग मैच की तैयारी में लग जाते हैंl विश्व के अधिकांश देशों को अपने खिलाड़ी बेचने वाला नीदरलैंड देश जो पिछले ब्राजील में हुए विश्व कप में तीसरे स्थान को हासिल किया था,आज विश्वकप के फुटबॉल मैच की श्रृंखला में खेलने से बाहर हैl रो ब्रायन, पेशी इस्निडार,हंटलार,डेली ब्लिंड सहित अनेक खिलाडी अपने जीते जी इतिहास और रूस में चल रहे विश्व फुटबॉल से नए इतिहास की किताब लिख जाएंगेl  नए खिलाड़ी अपनी ताकत और पांव के कौतुक से फुटबॉल की दुनिया का नया अध्याय रचने में लगे हुए हैंl

हर बार की तरह विश्वकप फुटबॉल के तूफानी दौर में पूरी पृथ्वी फुटबॉल स्टेडियम में बदल चुकी हैl |सूर्योदय से सूर्यास्त से परे जाकर दुनिया फुटबॉल मैचों के अनुसार अपनी सुबह और रात में जी रही हैl मीडिया के कारण संपूर्ण विश्व इन मैचों का साक्षी बना हुआ हैl  गोल का शोर सिर्फ रूस के स्टेडियम में ही नहीं,बल्कि संपूर्ण पृथ्वी में गूंज रहा हैl

जीत,जीत का हर्ष और हर्ष का उत्कर्ष फुटबॉल खिलाडियों को देखकर ही अनुभव किया जा सकता हैl  फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं,बल्कि खेल की संस्कृति का जीवंत रूप हैl फुटबॉल जीत, प्रगति और आत्मविश्वास की संस्कृति का उन्मादक खेल है,जहां निर्धारित समय के अंतिम क्षण तक जीत की ख्वाहिश बनी रहती हैl गोल बनते ही दर्शकों की खुशी पटाखों की तरह फूट पड़ती है वह फिर स्टेडियम हो,या टेलीविजन,कार का रेडियोl 2 जुलाई को रूस के स्टेडियम में बेल्जियम और जापान नहीं खेल रहे थे,बल्कि उनके बहाने से यूरोप और एशिया फुटबॉल खेल रहा था और अंतिम मिनट पर बेल्जियम के मैदान में हर्ष और विषाद का करंट फैल गया थाl

फुटबॉल खेल में खिलाड़ी समय की तरह ही,समय से ही खेलता रहता है,जूझता रहता है, हांफता है,गिरता है,उठता है,दौड़ता है,किक करता है, मिस करता है, बावजूद इसके अंपायर की सीटी बजने से पहले तक दौड़ता रहता हैl फुटबॉल गति की कला को नियंत्रित करने का विलक्षण मोहक खेल है,कुछ भी पहले से कह पाना मुश्किल हैl कोई नहीं सोच सकता था कि मिलियन डॉलर की तनख्वाह पाने वाले मेसी को अपनी जन्मभूमि अर्जेंटीना जाना पड़ेगा और इस तरह से विश्वकप के भावी इतिहास में कभी शामिल नहीं हो सकेl उरुगवे से खेलते हुए पुर्तगाल की फुटबॉल टीम के बादशाह रोनाल्डो को अपने घर का रास्ता देखना पड़ाl कुछ ऐसे कि अगले विश्व फुटबॉल मैच में वे मैदान में नहीं दिखाई देंगेl ३०जून २०१८ में रूस का फुटबॉल स्टेडियम इन खिलाडियों के जीवन के इतिहास का काला दिवस सिद्ध हुआl

रूस की धरती इस समय विश्व के फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए अखाडा बनी हुई है,जहां विश्व के जाने-माने खिलाड़ी भी फुटबॉल से अधिक खिलाडियों से पहलवानी करते हुए नज़र आए हैंl  जब तक दुसरे खिलाडियों से देह टकराकर अक-बकाकर पसर जाते रहे हैं, जिससे पेनल्टी  मिलने का अवसर मिल जाए और थोड़ा समय भी कट जाए एवं आराम भी मिल जाएl तन-मन सुस्ती भी लेl इस बीच कनखियों से अंपायर के नज़र पड़ने की प्रतीक्षा भी कर लेते हैंl दूसरे पक्ष के गोल बनाने वाले खिलाडियों के पांव पर पांव रख देते हैं,घुटनों के पीछे से घातक चोट पहुंचाते हैं, सिर से सिर टकराना,कंधे दबोचना,पीठ पर चोट पहुँचाना आम बात हैl फुटबॉल खेल से अधिक अब एक तरह के जंग में बदल गया है, क्योंकि यह अरबों- खरबों के डॉलर और यूरो की पूंजी में बदल गया है मिलियंस का वेतन होता है,और मिलियंस में खिलाडियों की खरीद-फरोख्त होती हैl इसी तरह से अपने-अपने क्लबो की उन्नति और प्रसिद्दी तथा पूंजी के लिए कोच की खरीद-फरोख्त भी जारी रहती है, क्योंकि फुटबॉल खेल और क्लब की पहचान में खिलाडियों से अधिक कोच का महत्व रहता है और उसी से टीम की विश्वव्यापी पहचान बनती हैl कोच के नाम से टीम जानी जाती है पर,दूसरा महत्त्वपूर्ण शख्स कीपर होता है, जो विपक्ष के लिए गोल  बनवा ता है और अपने घर में विरोधी टीम के फुटबॉल किक से होने वाले गोल को रोकता है,क्योंकि फुटबॉल खेल में गोल बचाना भी अपनी तरह से गोल बनाना हैl

मैच के दौरान फुटबॉल के मैदान में अंपायर सिर्फ खेल का निर्णायक ही नहीं,बल्कि खेल का ईश्वर होता हैl  | एक बार जो निर्णय ले लेता है और ऐलान कर देता है उसके बाद वह अपनी गलती को भी संशोधित नहीं कर पाता है,जबकि हजारों कैमरों की आँखों में कैद सेकंड की सच्चाईयों के रूबरू होने पर विश्व के फुटबॉल विशेषज्ञ उस पर अपनी राय और मत जारी करते हैं,पर उसका कोई मतलब नहीं होता हैl  मैच जिस रूप में जिस तरह से जिसके पक्ष में समाप्त होता है वही निर्णय अंतिम होता हैl अंपायर फुटबॉल खेल के भीतर दौड़ते-भागते हुए ऑफसाइड,पेनल्टी,कोर्नर, पीला और लाल कार्ड जारी करते हुए फुटबॉल टीमों का वारा-न्यारा करते रहते हैंl ऐसा ही १ जुलाई दास प्रथा से मुक्ति के ऐतिहासिक दिवस पर रूस के विश्वकप के लिए ब्राज़ील और मेक्सिको की टीम के खेल अवसर पर अंपायर द्वारा मेक्सिको को पेनल्टी खेलने का अवसर नहीं दिया गयाl संभवत ब्राजील टीम के समानांतर वह भी एक गोल बना लेते,तो दोनों टीमों को १५ मिनट के आसपासू का मौका मिलता और जीत की तस्वीर कुछ दूसरी होती,लेकिन उसके कुछ मिनट बाद अंत में ब्राज़ील ने एक गोल दाग दिया और मैच ब्राजील के पक्ष में चला गयाl  यह दुर्भाग्यजनक घटना कितनी ही टीमों के साथ घटित हुई हैl इन सबके इसके बावजूद खेल और फुटबॉल खेल की दुनिया में हार के बाद दूसरे दिन की सुबह जीत के हौसले से भरपूर होती हैl  |यही फुटबॉल खेल की सच्चाई है कि खिलाड़ी खेल में हार के बाद भी हार नहीं मानता और जीती हुई टीम को अपना दुश्मन नहीं समझता हैl

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुंबई)

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