`फैशन` में डगमगाता समाज

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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आधुनिकता की देन है ‘फैशन’। ‘फैशन’ के पीछे आज हर वर्ग दीवाना-सा दिखाई देता है। मार्ग पर चलते हुए आपको नाना-प्रकार के परिधान पहने हुए युवा दिखाई दे जाएँगे। सस्ते से लेकर मंहगे परिधानों की चमक-दमक से प्रभावित युवा स्वयं को संवारने में विशेष रूचि रखते हैं,परन्तु इस होड़ में मात्र युवा सम्मिलित है,तो यह कहना गलत होगा। आज अमीर-गरीब,बूढ़ा-बच्चा,गृहिणी इत्यादि सभी इसकी गिरफ़्त में जकड़े हुए हैं। फैशन के बदलते स्वरूप के अनुसार परिधानों का स्वरूप बदलता है,यहाँ तक कि चश्में,जूते,गहने,सौंदर्य प्रसाधनों में तक इसके बदलते स्वरूप को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। किसी समय में परिधान और अन्य वस्तुएँ मात्र शरीर को ढँकने या सजाने का कार्य करती थी। उनकी आवश्यकता समय के अनुसार थी। विवाह,त्योहार आदि अवसरों पर लोग स्वयं को थोड़ा-सा विशेष बनाने का प्रयास करते थे,परन्तु आज के दौर में लोग आम जीवन में भी स्वयं को अलग दिखाना चाहते हैं। वे स्वयं को फैशनेबल दिखाना चाहते हैं। परिधानों,जूतों तथा अन्य सामग्री को खरीदने के लिए उन्हें पैसा खर्च भी करना पड़े,तो वह घबराते नहीं हैं। फैशन ने लोगों के जीवन में अदभुत परिवर्तन किया है। फैशन की विशेषता है कि जो उसका विरोध करते हैं,वे भी इसका अंग बन जाते हैं। अमूमन फैशन के प्रतिवाद का उदय तब होता है,जब वह सार्वभौम रूप ग्रहण कर लेता है। फैशन को संवृत्ति बनाने वाले तत्व हमेशा वर्तमान समय में रहते हैं। नए के प्रति आकर्षण फैशन का भविष्य तय करता है। नए के प्रति उत्सुकता असुरक्षा से पैदा होती है। इसके लिए वह सब जगह से सामग्री ग्रहण करता है। फैशन का जन्म व्यापार के कारण नहीं होता। फैशनोन्मुख व्यवहार की अनुपस्थिति में फैशन का व्यापार नहीं है।    फैशनोन्मुख व्यवहार पूरी तरह खुला होता है। अप्रतिरोधात्मक आकर्षण पैदा करता है। यह प्रक्रिया संक्रमणकाल में पैदा होती है।
फैशन का सामाजिक हैसियत से भी रिश्ता होता है,इसके बगैर फैशन पर चर्चा संभव ही नहीं है। दूसरी बात यह कि,फैशन का उदय हमेशा उच्च वर्गों में हुआ। फैशन को लेकर इसी वर्ग में प्रतिस्पर्धा रही है। प्रतिस्पर्धा के कारण अनेक नए रूपों ने जन्म लिया है। उच्च वर्ग के फैशन रूपों के प्रयोग की निम्न वर्गों को किसी अवसर विशेष पर ही अनुमति दी जाती थी,यह स्थिति पूर्व-आधुनिक दौर में थी। यही फैशन के व्यापार के लिए ऊर्जा का कार्य करता है।
परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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